हिमाचल प्रदेश 31 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा) हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत जिला प्रशासन ने मतदाता सूचियों का प्रकाशन शुरू कर दिया है। इसी क्रम में जिला उपायुक्त कार्यालय शिमला ने शुक्रवार शाम पांच बजे पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची जारी कर दी।मतदाता सूची जारी होने के बाद अब वे लोग, जिनके नाम सूची में शामिल नहीं हैं,पंचायत सचिव या बीडीओ कार्यालय में आवेदन कर अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।पंचायत क्षेत्रों में नया वोट बनवाने के लिए 2 रुपये शुल्क रखा गया है, जबकि शहरी निकाय क्षेत्रों में यह शुल्क 50 रुपये निर्धारित किया गया है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने तक नए मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकेंगे, हालांकि एक बार सार्वजनिक हो चुकी सूची से नाम हटाने की अनुमति नहीं होगी।प्रदेश में इस समय कुल 3577 पंचायतें हैं और राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पंचायत क्षेत्रों में 55 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। नए नाम जुड़ने से मतदाताओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके अलावा प्रदेश की 31 पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन पूरा कर लिया गया है, जिसकी फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा चुकी है। स्वीकृति मिलने के बाद इसे सार्वजनिक कर आम जनता से 15 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे।हाईकोर्ट ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव 30 अप्रैल तक कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को अदालत में जवाब दाखिल करना है। आयोग का कहना है कि नई पंचायतों के गठन को लेकर उसे कोई आपत्ति नहीं है। वर्तमान में 29 पंचायतों को छोड़कर 3,548 पंचायतों की मतदाता सूचियां तैयार हैं, जिन्हें सार्वजनिक किया जाना शेष है।आज समाप्त हो रहा पंचायतों का कार्यकाल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। 1 फरवरी से पंचायतों की शक्तियां प्रशासकों को सौंप दी जाएंगी। सरकार द्वारा प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर अधिसूचना जारी की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार पंचायतों के अधिकार पंचायत सचिव या समिति को, पंचायत समितियों की जिम्मेदारी बीडीओ को और जिला परिषद की जिम्मेदारी एडीसी को सौंपी जा सकती है।पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि शनिवार को पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके बाद सभी विकास और प्रशासनिक कार्य प्रशासकों की निगरानी में संचालित होंगे।
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