दैनिक खबरनामा 30 मार्च 2026 पंजाबी विश्वविद्यालय से जुड़े फर्जी डिग्री और अंक प्रमाण पत्र (डीएमसी) मामले ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभिन्न संस्थानों द्वारा वेरिफिकेशन के लिए भेजे गए दस्तावेजों की जांच में बड़े पैमाने पर जालसाजी का खुलासा हुआ है।आरोप है कि यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी डिग्रियां और डीएमसी तैयार कर उनका इस्तेमाल किया गया, यहां तक कि कुछ मामलों में इन्हें वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की शिकायत पर स्टेट साइबर क्राइम पुलिस, मोहाली ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वेरिफिकेशन के लिए भेजे गए करीब पांच डिग्री और डीएमसी यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थीं। इन दस्तावेजों का फॉर्मेट असली प्रमाण पत्र जैसा था, लेकिन हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। कुछ मामलों में पुराने अधिकारियों के हस्ताक्षर स्कैन कर प्रिंट किए गए थे।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दिसंबर 2025 में परीक्षा शाखा का सर्वर अचानक डाउन हो गया था, जिसमें चार ट्रोजन वायरस मिले थे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का मैलवेयर सिस्टम में घुसकर डेटा से छेड़छाड़ कर सकता है। यूनिवर्सिटी ने 26 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक के डेटा की जांच के निर्देश दिए हैं।मामले की तह तक जाने के लिए साइबर पुलिस ने गूगल लीगल अथॉरिटी और वर्ल्ड एजुकेशन सर्विसेज से भी जानकारी मांगी है। साथ ही यूनिवर्सिटी को एसक्यूएल लॉग्स और ईमेल डिटेल उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जल्द ही दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।