दैनिक खबरनामा | 20 अगस्त | अगरतला: तेलंगाना के नालगोंडा जिले के कोंडामल्लेपल्ली में स्कूल प्रिंसिपल कल्लू रूपा रेड्डी की हत्या के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच के मुताबिक, 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले दो नाबालिग छात्रों ने कथित तौर पर लूट के इरादे से वारदात को अंजाम दिया। दोनों छात्र एक ही हॉस्टल में रहते थे और महंगे मोबाइल, बाइक तथा मौज-मस्ती के लिए पैसे खर्च करने के आदी थे।
पुलिस के अनुसार, प्रिंसिपल ने दोनों को पैसों के खर्च को लेकर फटकार लगाई थी और उनके परिवार वालों को इसकी जानकारी देने की चेतावनी दी थी। इसी बात को लेकर दोनों छात्र उनसे नाराज चल रहे थे।
11 अगस्त को घर में हुई हत्या
पुलिस के मुताबिक, 11 अगस्त को रूपा रेड्डी की उनके घर में हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर चाकू से करीब 27 बार हमला किया और इसके बाद घर से नकदी व मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए।
वारदात से कुछ देर पहले रूपा रेड्डी ने अपनी मौसी से फोन पर बातचीत की थी। कॉल समाप्त होने से पहले उनके मुंह से निकला आखिरी शब्द ‘बाबू’ था। जांच में यही शब्द पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ।
‘बाबू’ शब्द ने छात्रों तक पहुंचाया
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि स्कूल में छात्रों को आमतौर पर ‘बाबू’ कहकर बुलाया जाता था। इसके बाद जांचकर्ताओं ने स्कूल के विद्यार्थियों पर भी फोकस किया। करीब 13 छात्रों को चिन्हित किया गया, जिनमें से 5 से पूछताछ की गई।
इसी दौरान 10वीं कक्षा के दो छात्रों की गतिविधियां पुलिस को संदिग्ध लगीं। दोनों अचानक काफी पैसे खर्च करते और मौज-मस्ती करते दिखाई दे रहे थे।
इसके बाद पुलिस ने इलाके में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। डोनियाला एक्स रोड पर बाइक से जा रहे दोनों छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि उनके कब्जे से 1.54 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इनमें 500 रुपये के तीन नोटों पर कथित तौर पर खून के निशान मिले।
पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर प्रिंसिपल की हत्या करने और घर से नकदी ले जाने की बात कबूल की।
वारदात से पहले घर की रेकी
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों छात्रों ने हत्या से करीब एक सप्ताह पहले रूपा रेड्डी के घर की रेकी की थी। घटना वाले दिन उन्होंने कोंडामल्लेपल्ली में कपड़े बदले, चाकू और दस्ताने खरीदे और मुख्य रास्ते पर लगे CCTV से बचने के लिए घर में पीछे की ओर से प्रवेश किया।
पुलिस के मुताबिक, प्रिंसिपल ने दोनों छात्रों को पहचान लिया था। इसके बाद आरोपियों ने उन पर चाकू से लगातार हमले किए। हत्या के बाद दोनों नकदी और मोबाइल फोन लेकर उसी पिछले रास्ते से निकल गए।
महंगे फोन और बाइक का था शौक
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी एक ही हॉस्टल के कमरे में रहते थे। दोनों को महंगे मोबाइल, बाइक और घूमने-फिरने का शौक था। पुलिस के अनुसार, वे सोशल मीडिया और YouTube के माध्यम से जल्दी पैसा कमाने के तरीकों की तलाश भी कर रहे थे।
हॉस्टल में उनके बैग से एक फोन और कुछ रुपये मिलने के बाद प्रिंसिपल ने उन्हें कक्षा में डांटा था। उन्होंने उनके माता-पिता को इस बारे में बताने की चेतावनी भी दी थी। पुलिस का कहना है कि इसी घटना के बाद दोनों के मन में प्रिंसिपल के प्रति नाराजगी बढ़ गई थी।
70 से ज्यादा CCTV कैमरों की जांच
जिले के पुलिस अधीक्षक सरथ चंद्र पवार ने मामले को गंभीर चुनौती मानते हुए देवरकोंडा DSP के नेतृत्व में पांच विशेष जांच टीमें बनाई थीं।
जांच में फोरेंसिक साक्ष्यों, फिंगरप्रिंट, डॉग स्क्वॉड, CCTV रिकॉर्डिंग और तकनीकी विश्लेषण की मदद ली गई। पुलिस टीमों ने करीब 30 किलोमीटर के क्षेत्र में 70 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और 80 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की।
लगातार जांच के बाद पुलिस दोनों नाबालिग आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के कब्जे से 1.54 लाख रुपये नकद, मृतक का मोबाइल फोन, करीब 60 हजार रुपये में खरीदा गया एक iPhone, वारदात में इस्तेमाल चाकू, दस्ताने, मास्क और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, जांच की शुरुआत रूपा रेड्डी के आखिरी शब्द ‘बाबू’ से हुई और आगे CCTV फुटेज, फोरेंसिक जांच तथा तकनीकी साक्ष्यों ने मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए कथित हत्यारों तक पहुंचने में मदद की। इसके साथ ही पुलिस ने हत्या के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा करने का दावा किया है।