दैनिक खबरनामा चंडीगढ़ 25 मई 2026 : हरियाणा में नगर निगम मेयरों के प्रत्यक्ष चुनाव लागू हुए करीब साढ़े सात साल बीत चुके हैं, लेकिन अब भी राज्य के मौजूदा नगर निगम कानून में जरूरी बदलाव नहीं किए जाने से मेयरों की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। इसी वजह से अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत नगर निगम के नव-निर्वाचित मेयरों की शपथ प्रक्रिया पर कानूनी विवाद खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार रोहतक मंडल आयुक्त राजीव रतन 26 मई को सोनीपत नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर राजीव जैन को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाने वाले हैं। वहीं अम्बाला मंडल आयुक्त संजीव वर्मा जल्द ही अम्बाला की मेयर अक्षिता सैनी और पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल को शपथ दिलाएंगे।
मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता और नगर निकाय कानून विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने गंभीर कानूनी विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 53 में आज भी यह व्यवस्था मौजूद है कि नगर निगम की पहली बैठक में निर्वाचित पार्षद अपने बीच से मेयर का चुनाव करेंगे।
यानी वर्तमान कानून अब भी अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को मान्यता देता है, जबकि व्यवहार में जनता सीधे मेयर का चुनाव कर रही है। इतना ही नहीं, धारा 53 में बराबर वोट पड़ने की स्थिति में “ड्रा ऑफ लॉट” यानी लॉटरी के जरिए विजेता तय करने का भी प्रावधान अब तक बना हुआ है।
हेमंत कुमार के मुताबिक सितंबर 2018 में हरियाणा सरकार ने मेयरों के प्रत्यक्ष चुनाव की व्यवस्था लागू की थी, लेकिन उसी दौरान मूल अधिनियम में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया। बाद में नवंबर 2018 में चुनाव नियमावली के नियम 71 में बदलाव कर मंडल आयुक्त को सीधे निर्वाचित मेयरों को शपथ दिलाने का अधिकार दे दिया गया।
यहीं से कानूनी टकराव की स्थिति पैदा हुई, क्योंकि अधिनियम और नियमावली में अलग-अलग व्यवस्था लागू हो गई। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी व्यवस्था में अधिनियम नियमों से ऊपर माना जाता है। ऐसे में यदि दोनों में विरोधाभास हो तो अधिनियम को ही प्रभावी माना जाएगा।
उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से राज्य सरकार और हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग को इस संबंध में कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, ताकि धारा 53 में संशोधन कर प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को पूर्ण कानूनी मान्यता दी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कानून में स्पष्ट संशोधन नहीं होता, तब तक भविष्य में प्रत्यक्ष रूप से चुने गए मेयरों की वैधानिकता को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि मार्च 2025 में हरियाणा के आठ नगर निगमों के प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयरों को पंचकूला में सामूहिक रूप से शपथ दिलाई गई थी। उस समय भी यह कानूनी मुद्दा चर्चा में आया था।
हालांकि दिसंबर 2025 में पारित नए हरियाणा नगर निकाय विधेयक में इस विसंगति को दूर करने का प्रावधान किया गया है, लेकिन नया कानून लागू होने तक पुराना हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 ही प्रभावी रहेगा। ऐसे में सरकार पर जल्द संशोधन करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।