दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 18 जुलाई: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। इसी मुद्दे को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व आज दिल्ली के लिए रवाना हो गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला साथ में राजधानी पहुंचेंगे। इस यात्रा को पार्टी “राज्य के दर्जे की बहाली” अभियान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर घेराव
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने पहले ही ऐलान किया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि अनुमति मिले या न मिले, पार्टी प्रतिनिधिमंडल 19 जुलाई को दिल्ली जरूर पहुंचेगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बार सिर्फ प्रतीकात्मक विरोध नहीं होगा। केंद्र पर दबाव बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर गोलबंदी की तैयारी है। अगर जंतर-मंतर की अनुमति नहीं मिली तो पार्टी के पास वैकल्पिक योजना भी है, लेकिन दिल्ली का कार्यक्रम रद्द नहीं होगा। इस प्रदर्शन के लिए देशभर की 52 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को आमंत्रण भेजा गया है।
शोक के बीच भी नहीं रुका संकल्प
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अब्दुल्ला परिवार ने हाल में एक करीबी सदस्य खोया है। डॉ. फारूक अब्दुल्ला के छोटे भाई डॉ. मुस्तफा कमाल का निधन हुआ है। बावजूद इसके पार्टी ने अपने तय कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके चाचा डॉ. मुस्तफा खुद नहीं चाहते थे कि उनके कारण कोई कार्यक्रम टले। 11 जुलाई को तबीयत बिगड़ने पर भी फारूक अब्दुल्ला ने निर्देश दिया था कि जम्मू का निर्धारित कार्यक्रम जारी रखा जाए। उसी भावना के साथ 20 जुलाई का दिल्ली कार्यक्रम भी होगा। पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ रैली नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की जनता से किया गया वादा है।
दिल्ली दौरे का एजेंडा क्या है
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अलावा इस दौरे के कई और उद्देश्य हैं। मई में भी उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि वे राज्य का दर्जा, उपराज्यपाल की शक्तियों और आरक्षण जैसे मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा के लिए दिल्ली जाएंगे।
इस बार भी तीन मुद्दे प्राथमिकता में हैं:
1. राज्य का दर्जा तुरंत बहाल हो
नेशनल कॉन्फ्रेंस का तर्क है कि विधानसभा चुनाव कराकर लोकतंत्र बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा दिए बिना यह अधूरी है।
2. जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन
20 जुलाई के धरने के जरिए केंद्र को यह संदेश देना कि राज्य के दर्जे की मांग सिर्फ एक दल की नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर की सामूहिक आवाज है।
3. केंद्र से सीधी बातचीत
प्रदर्शन के साथ-साथ शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर प्रशासनिक अधिकारों, एलजी और चुनी हुई सरकार के बीच अधिकारों के बंटवारे पर स्पष्टता मांगी जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के रूप में चल रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद लोगों को उम्मीद थी कि राज्य का दर्जा जल्द वापस मिलेगा, लेकिन देरी के कारण नाराजगी बढ़ रही है।
ऐसे हालात में जब मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों एक साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं, तो इसका साफ संकेत है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अब इस मुद्दे पर निर्णायक रुख अपनाने के मूड में है। अगले 2-3 दिनों में होने वाली बैठकों और बयानों से ही तय होगा कि राज्य के दर्जे की बहाली की दिशा में कोई ठोस पहल होती है या नहीं।