दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 1 जून : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑनलाइन सेवाओं को लेकर एक बार फिर छात्रों और अभिभावकों की नाराजगी सामने आई है। 12वीं कक्षा के पुनर्मूल्यांकन (री-वैल्यूएशन) से जुड़ी प्रक्रिया शुरू होने की घोषणा के बावजूद निर्धारित समय पर पोर्टल पूरी तरह सुचारु रूप से काम नहीं कर सका, जिससे हजारों विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने के बीच री-वैल्यूएशन के लिए आवेदन करने वाले छात्र लगातार वेबसाइट पर पहुंचते रहे, लेकिन कई घंटों तक पोर्टल तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं हो पाया। इससे छात्रों में असमंजस और चिंता का माहौल बन गया।
पहले बदली तारीख, फिर तकनीकी बाधाएं
बोर्ड ने पहले पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया बाद की तारीख से शुरू करने का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन बाद में छात्रों की सुविधा और विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए इसे पहले शुरू करने का फैसला लिया गया। हालांकि, निर्धारित दिन पर ही पोर्टल की उपलब्धता को लेकर समस्याएं सामने आने लगीं।
कई छात्रों और अभिभावकों ने शिकायत की कि वेबसाइट लंबे समय तक मेंटेनेंस मोड में दिखाई देती रही, जिसके कारण वे आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।
पहले भी उठ चुके हैं तकनीकी व्यवस्था पर सवाल
यह पहला अवसर नहीं है जब बोर्ड की डिजिटल प्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इससे पहले उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान भी वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतें देखने को मिली थीं। कई छात्रों ने आवेदन और भुगतान से जुड़ी समस्याओं की जानकारी साझा की थी।
कुछ विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल प्रतियों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए थे। शिकायतों में अस्पष्ट स्कैनिंग, अधूरे पृष्ठ और मूल्यांकन संबंधी जानकारी स्पष्ट न होने जैसी बातें शामिल थीं।
लाखों छात्रों पर असर
बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां प्राप्त करने और मूल्यांकन की समीक्षा के लिए आवेदन किया है। ऐसे में ऑनलाइन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी का असर सीधे उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है जो उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।
एडमिशन प्रक्रिया को लेकर बढ़ी चिंता
देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में दाखिले का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में यदि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती, तो कई छात्रों के अंतिम अंकों और मेरिट पर प्रभाव पड़ सकता है। अभिभावकों का कहना है कि बोर्ड को तकनीकी व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाना चाहिए ताकि छात्रों के भविष्य पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।
समाधान की उम्मीद
शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के दौर में बोर्ड को अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की क्षमता और विश्वसनीयता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि संबंधित तकनीकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी होगी।