दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 11 अगस्त : उद्योगपति गौतम अडानी और उनके सहयोगियों को अमेरिकी अदालत से आपराधिक मामले में राहत मिलने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने अदालत के फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले में जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक है।
राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “इसमें जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं अधिक है। एक समझौता कर चुके प्रधानमंत्री को भारत के हित बेचने के लिए मजबूर किया गया। भारत इसकी भारी कीमत चुका रहा है।”
अमेरिकी अदालत ने आपराधिक आरोप किए खारिज
राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब अमेरिका की एक अदालत ने सोमवार को गौतम अडानी, सागर अडानी और उनके सहयोगी विनीत जैन के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को समाप्त कर दिया। अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर अदालत ने मामले में लगाए गए आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया।
न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के जिला न्यायाधीश निकोलस गारौफिस ने अडानी समूह से जुड़े प्रतिभूति धोखाधड़ी और वायर फ्रॉड के आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने अडानी पक्ष और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के बीच समझौते को भी अंतिम मंजूरी दे दी। समझौते के तहत अडानी पक्ष अमेरिकी सरकार को 1.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगा। हालांकि, इस भुगतान के तहत किसी अपराध को स्वीकार नहीं किया गया है और इससे संबंधित दीवानी प्रतिभूति धोखाधड़ी के आरोपों का निपटारा किया गया है।
गौतम अडानी ने फैसले का किया स्वागत
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं।
अडानी ने कहा कि चुनौतीपूर्ण दौर के दौरान उनका विश्वास सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में बना रहा। उन्होंने उन लोगों के प्रति भी आभार जताया, जिन्होंने उन पर, व्यवस्था और भारत की न्याय व्यवस्था की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि अडानी नाम आगे भी “राष्ट्र निर्माण” की दिशा में काम करता रहेगा।
क्या थे अडानी समूह पर आरोप?
अमेरिकी न्याय विभाग ने वर्ष 2024 में अडानी समूह से जुड़े लोगों के खिलाफ आरोपपत्र सार्वजनिक किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि समूह ने भारत की सरकारी संस्थाओं से सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने के लिए करीब 26.5 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत योजना में भूमिका निभाई।
इसके अलावा अडानी पक्ष पर अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया था। आरोप था कि कंपनी की भ्रष्टाचार-विरोधी गतिविधियों को लेकर निवेशकों के सामने गलत जानकारी पेश की गई।
अमेरिकी न्याय विभाग की कार्रवाई के अलावा, अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने भी गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ दीवानी आरोप दायर किए थे।
अमेरिकी सरकार ने आगे कार्रवाई से किया था इनकार
सोमवार के फैसले से पहले अमेरिकी न्याय विभाग ने मई में अदालत को बताया था कि वह गौतम अडानी और उनके सहयोगियों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई नहीं करेगा।
इसके बाद जुलाई में अमेरिकी प्रधान एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉट्टर ने भी कहा था कि अडानी समूह के खिलाफ ये आरोप शुरुआत में ही नहीं लगाए जाने चाहिए थे।
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद जहां अडानी समूह ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में मिली राहत के रूप में देखा है, वहीं राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े किए हैं।