दैनिक खबरनामा ब्यूरो। ताइपे, 12 अगस्त: ताइवान सरकार ने उसके पूर्वी तट के पास चीन और इंडोनेशिया के बीच प्रस्तावित नौसैनिक अभ्यास को लेकर कड़ा विरोध जताया है। ताइवान ने इस अभ्यास को ‘‘खतरनाक’’ बताते हुए आरोप लगाया कि चीन अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र पर उसका अधिकार है।
चीन लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। जून में चीन ने ताइवान के पूर्वी तट के पास तटरक्षक गश्त शुरू की थी, जिसके बाद ताइपे में नाराजगी और अमेरिका समेत कुछ पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ गई थी।
अगस्त के मध्य में प्रस्तावित है नौसैनिक अभ्यास
चीन के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि अगस्त के मध्य में ताइवान के पूर्व में किसी स्थान पर इंडोनेशियाई नौसेना के एक युद्धपोत के साथ ‘‘नेविगेशन अभ्यास’’ किया जाएगा। हालांकि, अभ्यास की सटीक जगह नहीं बताई गई है।
ताइवान के आसपास किसी विदेशी नौसेना के साथ चीन का इस तरह का अभ्यास असामान्य माना जा रहा है। इंडोनेशियाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में पूछे गए सवालों का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
ताइवान ने बताया सैन्य उकसावे की कार्रवाई
ताइवान की चीन नीति से जुड़े मुख्य निकाय ‘मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल’ ने मंगलवार देर रात इस प्रस्तावित अभ्यास को ‘‘सैन्य उकसावा’’ करार दिया। परिषद ने चीन से इस ‘‘खतरनाक गतिविधि’’ को तत्काल रोकने की मांग की, जिससे मौजूदा स्थिति प्रभावित हो सकती है।
परिषद ने कहा कि हाल के दिनों में चीन ने ताइवान के पूर्वी हिस्से में तथाकथित ‘‘नियमित कानून-प्रवर्तन गश्त’’ के अलावा अब इसी क्षेत्र के समुद्री इलाके में अन्य देशों के साथ सैन्य अभ्यास करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
ताइवान सरकार ने आरोप लगाया कि चीन का वास्तविक उद्देश्य ‘‘अभ्यास के नाम पर विस्तार’’ करना है। उसके मुताबिक, बीजिंग अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह गलत संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र पर चीन का अधिकार या अधिकार-क्षेत्र है।
इंडोनेशियाई युद्धपोत को लेकर ताइवान ने दी सफाई
ताइवान की संसद में बुधवार को सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए सैन्य खुफिया विभाग के सहायक उप प्रमुख वू तिएन-जेन ने कहा कि चीन द्वारा बताए गए इंडोनेशियाई युद्धपोत का उद्देश्य विशेष रूप से चीनी नौसेना के साथ अभ्यास करना नहीं था।
उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई युद्धपोत जापान से लौट रहा था और ताइवान के पूर्व में प्रशांत महासागर में करीब 70 से 80 समुद्री मील की दूरी पर था।
वू ने कहा कि सैन्य दृष्टि से इस गतिविधि का ताइवान पर सीधा प्रभाव नहीं है, लेकिन इसका भू-राजनीतिक महत्व जरूर है।
इंडोनेशिया से स्पष्टीकरण मांगा
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने अलग से बताया कि उसने इंडोनेशिया से चीन के साथ प्रस्तावित नौसैनिक अभ्यास में उसकी भागीदारी को लेकर ‘‘स्पष्टीकरण’’ मांगा है।
ताइवान और चीन के बीच पहले से जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। ताइपे का कहना है कि चीन लगातार ताइवान के आसपास अपनी सैन्य और समुद्री गतिविधियां बढ़ा रहा है, जबकि बीजिंग इन गतिविधियों को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताता रहा है।