दैनिक खबरनामा ब्यूरो। कराकास, 29 जून: वेनेजुएला में इस सप्ताह आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद राहत एवं बचाव अभियान रविवार को भी लगातार जारी रहा। बचाव दल मलबे में दबे लोगों को खोजने में जुटे हैं और बीच-बीच में जीवित लोगों के मिलने की खबरें इस कठिन अभियान के बीच उम्मीद की किरण बन रही हैं।
बुधवार को आए भूकंपों में मरने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 1,500 तक पहुंच गई है। देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्य ला गुआइरा में विभिन्न देशों से पहुंचे राहत दल बचाव कार्य में लगे हुए हैं। यह राज्य लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेजुएला का सबसे प्रभावित इलाका बनकर उभरा है।
राजधानी कराकास से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर स्थित तटीय राज्य ला गुआइरा में अनेक इमारतें पूरी तरह ढह गईं और रेत व मलबे के बड़े ढेर में तब्दील हो गईं।
अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और जब तक जीवित लोगों के मिलने की संभावना बनी हुई है, तब तक इसे रोका नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि रविवार को भी कुछ लोगों को जीवित निकाला गया है। साथ ही उन्होंने इमारतों की सुरक्षा और रहने योग्य स्थिति का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रपति आयोग के गठन की घोषणा की।
अपने मंत्रियों के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने बताया कि स्कूलों में एक सप्ताह तक और अवकाश रहेगा, जबकि ला गुआइरा में बिजली आपूर्ति लगभग 75 प्रतिशत तक बहाल कर दी गई है।
सरकार, जिसका नेतृत्व जनवरी में अमेरिका की कार्रवाई के बाद पूर्व राष्ट्रपति के हटने के पश्चात डेल्सी रोड्रिगेज कर रही हैं, ने राहत सामग्री पहुंचाने वाले नागरिक स्वयंसेवकों का आभार जताया। हालांकि बाद में प्रशासन ने ला गुआइरा जाने वाले मार्ग पर आवाजाही सीमित कर दी, यह कहते हुए कि अत्यधिक यातायात के कारण आपातकालीन वाहनों के संचालन में बाधा आ रही थी।
इससे पहले कार्यवाहक राष्ट्रपति के भाई और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि रविवार को मृतकों की संख्या में 20 और लोगों की वृद्धि हुई, जिससे कुल आंकड़ा 1,450 तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि 3,150 लोग अब भी घायल हैं, 12,721 लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और 774 इमारतें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि एक ओर लोगों की जान बचाने का प्रयास जारी है, वहीं दूसरी ओर उन परिवारों के लिए अस्थायी शिविर तैयार किए जा रहे हैं जिनके घर नष्ट हो गए हैं या जो किसी कारणवश अपने घरों में वापस नहीं लौट सकते।
विदेशी राहत दलों के पहुंचने से पहले कई दिनों तक स्थानीय परिवार और स्वयंसेवक स्वयं मलबे से लोगों और शवों को निकालने में जुटे रहे। इस दौरान भारी मशीनों की कमी और सरकारी संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर शिकायतें भी सामने आईं। लगातार आ रहे सैकड़ों आफ्टरशॉक्स ने नुकसान को और बढ़ा दिया तथा स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना रहा।
सरकार के अनुसार, सप्ताहांत के दौरान शनिवार शाम तक कम से कम 33 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। इसके बावजूद अभी भी हजारों लोगों का कोई पता नहीं चल सका है।
हालांकि सरकार ने लापता या मलबे में फंसे लोगों की संख्या कुछ सैकड़ों बताई है, लेकिन देश के राजनीतिक विपक्ष द्वारा संचालित एक वेबसाइट के अनुसार रविवार तक लगभग 50,000 लोग अब भी लापता हैं। यह संख्या एक दिन पहले दर्ज 55,000 लोगों की तुलना में कुछ कम है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) का अनुमान है कि 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले इन दोनों भूकंपों में मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह पिछली सदी में लैटिन अमेरिका की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक साबित होगी।
स्विस राहत दल के प्रमुख ने कहा कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती लगभग 72 घंटे ऐसे होते हैं, जब मलबे में फंसे लोगों को जीवित निकालने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसके बाद यह संभावना तेजी से कम हो जाती है।
उन्होंने बताया कि 80 सदस्यीय स्विस बचाव दल ने अपने आठ खोजी कुत्तों की सहायता से कई स्थानों पर जीवित लोगों का पता लगाया, लेकिन कुछ मामलों में उन्हें समय रहते बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। शनिवार शाम के साथ ही भूकंप के बाद 72 घंटे पूरे हो गए।