दैनिक खबरनामा ब्यूरो फरीदाबाद 25 मई 2026 : हरियाणा सेवा अधिकार आयोग ने फरीदाबाद में भूखंड का कब्जा देने में हुई देरी को लेकर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने विकास कार्य पूरे किए बिना ही ई-नीलामी करने पर नाराजगी जताते हुए आवंटी को मुआवजा देने के आदेश जारी किए हैं।
मामला फरीदाबाद के सेक्टर-89 स्थित प्लॉट नंबर-47 का है, जो ई-नीलामी के माध्यम से आयुष कटारिया को आवंटित किया गया था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि नवंबर 2023 में पूरी राशि जमा कराने और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद अब तक उन्हें भूखंड का कब्जा नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, कब्जा देने की कोई निश्चित समयसीमा भी तय नहीं की गई।
मामले में एचएसवीपी फरीदाबाद के एस्टेट ऑफिसर-II की ओर से आयोग को दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि साइट पर विद्युतीकरण का कार्य लंबित होने के कारण कब्जा नहीं सौंपा जा सका। हालांकि जलापूर्ति, सीवरेज और सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। विभाग ने यह भी स्वीकार किया कि लंबित कार्यों के चलते पहले जारी किया गया कब्जा प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। साथ ही विलंबित कब्जे पर ब्याज देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विद्युतीकरण कार्य पूरा होने के बाद नया कब्जा प्रस्ताव जारी किया जाएगा।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि भूखंडों की ई-नीलामी से पहले सभी आवश्यक विकास कार्य पूरे किए जाने चाहिए ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग विश्वास के साथ अपनी मेहनत की कमाई निवेश करते हैं और समय पर मूलभूत सुविधाएं मिलने की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे मामलों में देरी होने पर आवंटी ब्याज और मुआवजे का हकदार होता है।
निर्माण लागत में बढ़ोतरी और आवंटी पर पड़े अतिरिक्त वित्तीय बोझ को देखते हुए आयोग ने एचएसवीपी को निर्देश दिए कि आयुष कटारिया को 15 दिनों के भीतर 5,000 रुपये मुआवजा दिया जाए। साथ ही 5 जून 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट भी आयोग में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत वह अधिकतम 5,000 रुपये तक ही मुआवजा देने का अधिकार रखता है। यदि आवंटी इससे अधिक मुआवजा चाहता है तो वह उपभोक्ता आयोग या उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
आयोग ने उम्मीद जताई कि एचएसवीपी जल्द शेष औपचारिकताएं पूरी कर आवंटी को भूखंड का कब्जा सौंपेगा।