दैनिक ख़बरनामा नई दिल्ली। 27 मई :  तेज़ी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों ने दुनिया भर के रोजगार बाजार को नई दिशा देनी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मशीनें और स्वचालित प्रणालियां उन कार्यों को भी संभालने लगेंगी जिन्हें अब तक केवल प्रशिक्षित कर्मचारी ही करते थे। इसका सबसे बड़ा असर दफ्तरों और तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
निवेश और प्रौद्योगिकी जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत में बड़ी संख्या में नौकरियां तकनीकी बदलाव की वजह से प्रभावित हो सकती हैं। अनुमान यह है कि करोड़ों पारंपरिक पद या तो समाप्त होंगे या उनका स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। हालांकि, नई तकनीकों से जुड़े कुछ नए अवसर भी सामने आएंगे, लेकिन उनकी संख्या मौजूदा रोजगारों की तुलना में काफी कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जो सीमित स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी दिखाई दे रही है, वह केवल शुरुआती संकेत हैं। आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां लेखन, आंकड़ों का विश्लेषण, ग्राहक सेवा, सॉफ्टवेयर निर्माण और कार्यालय प्रबंधन जैसे कई कार्य तेज़ी और कम लागत में करने लगेंगी।
तकनीकी क्षेत्र में काम कर रही बड़ी कंपनियां इस दिशा में भारी निवेश कर रही हैं। बीते एक वर्ष में वैश्विक स्तर की कई प्रमुख कंपनियों ने आंकड़ा केंद्र, उच्च क्षमता वाले उपकरण, उन्नत संगणना प्रणालियां और भाषा आधारित तकनीकों के विकास पर अभूतपूर्व खर्च किया है। इससे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और तेज़ हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले जिन कार्यों को पूरी तरह मानव कौशल पर निर्भर माना जाता था, अब उनमें भी मशीनों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। आने वाले दो से तीन वर्षों में कई तकनीकी प्रणालियां इतनी सक्षम हो सकती हैं कि वे अधिकांश डिजिटल कार्य लगभग बिना मानवीय सहायता के पूरा कर सकें।
एक हालिया सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि भारत में कार्यरत अनेक वैश्विक सेवा केंद्र पहले ही उन्नत स्वचालित प्रणालियों और नई पीढ़ी की बुद्धिमान तकनीकों में निवेश कर रहे हैं। कई संस्थानों ने अपने नियमित कार्यों का बड़ा हिस्सा मशीनों के माध्यम से संचालित करना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला कि बड़ी संख्या में ऐसे कार्य मौजूद हैं जिन्हें पूरी तरह स्वचालित किया जा सकता है, जबकि अनेक अन्य कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कर्मचारियों की भूमिका को सीमित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप कौशल विकसित करना बेहद जरूरी होगा, ताकि बदलते रोजगार बाजार में उनकी उपयोगिता बनी रहे।

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