पंजाब 3 फरवरी 2026 (जगदीश कुमार) पंजाब के एस ए एस नगर में 66 केवी डिवीजन की एक अहम बैठक डिवीजन प्रधान हरजीत सिंह की अध्यक्षता में तथा डीएस डिवीजन सचिव जसपाल सिंह के संचालन में आयोजित की गई। बैठक में आगामी 12 फरवरी 2026 की प्रस्तावित हड़ताल की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बिजली बिल 2026, सीड बिल 2025 और लेबर कोड को लेकर गंभीर मंथन किया गया।बैठक में शामिल विभिन्न कर्मचारी और किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से पंजाब सरकार और पावरकॉम प्रबंधन की नीतियों का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार साम्राज्यवादी दिशा-निर्देशों के तहत बिजली क्षेत्र के पूर्ण निजीकरण की ओर बढ़ रही है। बिजली अधिनियम 2003 में लगातार संशोधन करते हुए अब बिजली संशोधन बिल 2025 पारित कर पूरे बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है।नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार भी इसी नीति के तहत बिजली विभाग की कीमती ज़मीनों को बेचने के फैसले ले रही है। बैठक में किसान विरोधी सीड बिल 2025 को रद्द कराने और पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग ज़ोरदार ढंग से उठाई गई।वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें तथाकथित सुधारों के नाम पर कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही हैं और सभी सत्ताधारी संसदीय पार्टियां निजीकरण की इस नीति पर एकमत हैं। इसी के तहत पंजाब में बिजली निगम के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज़ किया जा रहा है।
बैठक में पंजाब के किसानों, मजदूरों और कर्मचारियों से अपील की गई कि वे इस जनविरोधी निजीकरण के खिलाफ़ व्यापक, संयुक्त और निर्णायक संघर्ष की तैयारी करें। नेताओं ने चेतावनी दी कि सरकारें बिजली निगम को समाप्त करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही हैं।इसके साथ ही बठिंडा थर्मल कॉलोनी की ज़मीन की बिक्री के खिलाफ़ चल रहे आंदोलनों में अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की गई। बिजली क्षेत्र से जुड़ी सभी यूनियनों से कहा गया कि वे साझा संघर्ष की नीति अपनाते हुए 12 फरवरी 2026 की हड़ताल को पूरी तरह सफल बनाएं।बैठक को सर्कल प्रधान गुरबख्श सिंह, मुख्य सलाहकार लखा सिंह, उपप्रधान गुरमीत सिंह सहित कई अन्य नेताओं ने संबोधित करते हुए सरकार को तीखे आंदोलन की चेतावनी दी।