दैनिक खबरनामा। मंडी, 16 जून : हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 2300 करोड़ रुपये के क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एजेंसी ने पंजाब के जीरकपुर स्थित प्रॉपर्टी कारोबारी विजय जुनेजा और उनके बेटे मासूम जुनेजा के ठिकानों पर दूसरे दिन भी छापेमारी जारी रखी। कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए हैं।

ईडी ने अपराध से अर्जित धन को छिपाने और जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप में मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर लिया है। यह जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।

फर्जी क्रिप्टो स्कीम से 2.48 लाख लोगों को लगाया चूना

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 में सुभाष शर्मा ने अपने सहयोगियों हेम राज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा के साथ मिलकर ‘कोर्वियो कॉइन’ नामक एक कथित क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) योजना शुरू की थी। आरोप है कि इस स्कीम के जरिए देशभर के करीब 2.48 लाख लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया।

ईडी के अनुसार, यह पूरी व्यवस्था एक पोंजी स्कीम की तरह संचालित की जा रही थी, जिसमें नए निवेशकों से जुटाई गई रकम से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। इस कथित रैकेट के माध्यम से करीब 2300 करोड़ रुपये का वित्तीय घोटाला किया गया।

करोड़ों की रकम से खरीदी गईं संपत्तियां

जांच एजेंसी का दावा है कि विजय और मासूम जुनेजा इस नेटवर्क के अहम सदस्य थे। निवेशकों से जुटाई गई करोड़ों रुपये की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की गई, जिसका इस्तेमाल महंगी अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। संपत्तियों की रजिस्ट्री वास्तविक कीमत से काफी कम मूल्य पर कराई गई, जबकि शेष भुगतान नकद में किया गया।

बेनामी खातों से की गई मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि दोनों आरोपी कई बेनामी और कर्मचारियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का संचालन कर रहे थे। इन खातों का उपयोग कथित तौर पर धन को विभिन्न माध्यमों से घुमाकर उसकी वास्तविक स्रोत पहचान छिपाने (लेयरिंग) के लिए किया जाता था।

दुबई फरार है मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा

जांच एजेंसी के अनुसार, मामले का मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा कार्रवाई की आशंका के बाद दुबई फरार हो गया था। आरोपियों ने अपने डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित डोमेन भी हटाने का प्रयास किया। ईडी अब गिरफ्तार आरोपी मासूम जुनेजा को रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

ईडी का मानना है कि यह देश के बड़े क्रिप्टो आधारित वित्तीय घोटालों में से एक है, जिसकी जांच अभी जारी है।

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