
भगवंत सिंह मन
मुख्यमंत्री, पंजाब
दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 2 जून 2026 : पंजाब सरकार ने किसानों को राहत प्रदान करते हुए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और फसली ऋण नीति में बड़े बदलावों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि किसानों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऋण व्यवस्था में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक फसलों और कृषि गतिविधियों को कर्ज सुविधा के दायरे में शामिल किया गया है।
नई नीति के तहत गेहूं की फसल के लिए सहकारी बैंकों से मिलने वाली ऋण सीमा 24,380 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। वहीं, पराली प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 2,000 रुपये का अतिरिक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
गन्ना उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने उनकी ऋण सीमा 44,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे गन्ना किसानों को खेती संबंधी खर्चों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने पहली बार कई गैर-पारंपरिक और बागवानी फसलों को ऋण सुविधा में शामिल किया है। अब पोपलर, बांस, जामुन और लेमन ग्रास जैसी फसलों पर भी किसानों को निर्धारित सीमा तक ऋण मिल सकेगा। इसके अलावा लहसुन, प्याज और हाईब्रिड टमाटर जैसी नकदी फसलों के लिए अलग-अलग ऋण सीमाएं तय की गई हैं।
आधुनिक और उच्च मूल्य वाली खेती को प्रोत्साहन देने के लिए ड्रैगन फ्रूट और चिया सीड की खेती को भी ऋण सुविधा के दायरे में लाया गया है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए 47,000 रुपये प्रति एकड़ तथा चिया सीड के लिए 16,000 रुपये प्रति एकड़ तक ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए भी ऋण सीमा में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
किसानों के प्रति संवेदनशीलता बरतने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई फसलों पर ऋण सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। नई नीति से यह समस्या काफी हद तक दूर होगी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने निजी बैंकों को भी निर्देश दिए हैं कि किसानों की संपत्तियों की कुर्की या जब्ती जैसी कठोर कार्रवाई से बचा जाए और बकाया वसूली के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के घरों और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी या कुर्की जैसी कार्रवाइयों का सामाजिक स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ऐसे मामलों में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दे रही है।