दैनिक खबरनामा। पटियाला, 6 जून 2026: पंजाब के पटियाला जिले में ग्राम पंचायत निधियों के कथित करोड़ों रुपये के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक ठेकेदार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि मामले में फर्जी बिलों के जरिए सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं और सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्य प्रताप सिंह ने ठेकेदार दिनेश कुमार बंसल द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। बंसल ने विजिलेंस ब्यूरो थाना, पटियाला में 23 जुलाई 2025 को दर्ज एफआईआर संख्या 37 के तहत गिरफ्तारी से पूर्व जमानत की मांग की थी।
पंचायत खातों में थे करोड़ों रुपये
मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई। जांच में सामने आया कि गांव नलास खुर्द के तत्कालीन सरपंच मुंशी राम और पंचायत सदस्यों के कार्यकाल के दौरान पंचायत खातों में लगभग 58.43 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इसके अलावा वर्ष 2019 से 2022 के बीच विभिन्न अनुदानों, ब्याज और अन्य स्रोतों से करीब 7.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी प्राप्त हुई।
विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप
विजिलेंस जांच के अनुसार पंचायत ने विभिन्न विकास कार्यों पर 32.20 करोड़ रुपये खर्च दिखाए, लेकिन तकनीकी जांच में कई परियोजनाओं में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। स्टेडियम निर्माण कार्य में ही लगभग 3.61 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया।
जांच का सबसे अहम पहलू गांव के श्मशान घाट में इलेक्ट्रिक फर्नेस और शेड स्थापना परियोजना से जुड़ा है। विजिलेंस के मुताबिक इस परियोजना के लिए कई फर्मों को भुगतान किया गया, जिनमें दिनेश कुमार बंसल की फर्म भी शामिल थी। हालांकि मौके के निरीक्षण में कोई इलेक्ट्रिक फर्नेस स्थापित नहीं मिला।
जांच एजेंसी का आरोप है कि बिना फर्नेस लगाए ही भुगतान जारी कर दिया गया, जिससे पंचायत निधि को 43.32 लाख रुपये का नुकसान पहुंचा।
साजिश में शामिल होने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह केवल एक ठेकेदार है और उसने अपने हिस्से का कार्य पूरा किया था। वहीं राज्य सरकार ने दावा किया कि आरोपी केवल ठेकेदार नहीं, बल्कि कथित साजिश का सक्रिय भागीदार था। आरोप है कि उसने सरपंच और अन्य पंचायत अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी बिल तैयार किए और सरकारी धन की हेराफेरी में भूमिका निभाई।
राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि सामग्री वास्तव में खरीदी गई थी तो आरोपी को खरीद संबंधी दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड और आपूर्तिकर्ताओं का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि इलेक्ट्रिक फर्नेस या उससे संबंधित सामग्री वास्तव में खरीदी गई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है, जिसे गंभीर आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सहजता से नहीं दिया जा सकता।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दिनेश कुमार बंसल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।