दैनिक खबरनामा। शिमला, 12 जून:  हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में संचालित मेडिकल स्टोरों के आवंटन को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वर्षों से चली आ रही विशेषाधिकार व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब इन दुकानों का आवंटन खुली प्रतिस्पर्धा और टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस संबंध में प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर नई नीति लागू कर दी है।
नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड (एचपीएससीएससी) को रियायती अथवा प्राथमिकता के आधार पर मेडिकल स्टोर आवंटित करने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। सरकार का मानना है कि निगम एक लाभ अर्जित करने वाली संस्था है और उसे विशेष रियायतें देने से राज्य को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था। इसलिए अब अस्पताल परिसरों और मेडिकल कॉलेजों में स्थित दुकानों को खुली बोली के जरिए आवंटित किया जाएगा, जिससे बाजार दर के अनुरूप राजस्व प्राप्त हो सके।
सरकार ने यह भी तय किया है कि वर्तमान में एचपीएससीएससी को आवंटित दुकानों से होने वाले लाभ का बंटवारा सरकार और निगम के बीच 50:50 के अनुपात में किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक सरकारी मेडिकल कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय मानकों की उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष मेडिकल स्टोर स्थापित करने का प्रावधान भी किया गया है।
अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के केंद्र माने जाते रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार बदलते ही इन दुकानों से जुड़े फार्मासिस्टों के तबादले और व्यवस्थागत बदलाव चर्चा का विषय बन जाते थे। दवाओं के बड़े कारोबार के कारण इन दुकानों को लेकर हमेशा विशेष रुचि और खींचतान बनी रहती थी।
प्रदेश सरकार का दावा है कि खुली बोली की व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावनाएं कम होंगी। हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मेडिकल स्टोरों का मूल उद्देश्य मरीजों को सस्ती और सुलभ दवाएं उपलब्ध कराना है, केवल राजस्व बढ़ाना नहीं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को पहले की तरह रियायती दरों पर दवाएं मिलती रहेंगी या फिर अधिक बोली लगाने वाले निजी संचालकों के कारण दवाओं की कीमतों का बोझ आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं और बड़ी संख्या में लोग इन मेडिकल स्टोरों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में नई नीति का प्रभाव सीधे तौर पर मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिलेगा।

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