दैनिक खबरनामा। मुंबई, 16 जून : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे जुड़े महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में जल संकट गहराता जा रहा है। मानसून के आगमन में हो रही देरी के कारण शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली सात प्रमुख झीलों का जलस्तर घटकर महज 10 से 12 प्रतिशत रह गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आपात समीक्षा बैठक बुलाकर अधिकारियों को जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में मुंबई और एमएमआर क्षेत्र में अगस्त 2027 तक पेयजल आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जल संसाधन विभाग, बीएमसी और संबंधित एजेंसियों को समन्वित योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुंबई की लगभग दो करोड़ आबादी की जल जरूरतें अपर वैतरणा, मोदक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी झीलों पर निर्भर हैं। लेकिन जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा न होने से इन जलाशयों में उपलब्ध पानी तेजी से घटा है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
स्थिति को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने पूरे शहर में पहले ही 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर दी है। इसका असर केवल सामान्य आवासीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्ली और मलाबार हिल जैसे उच्चवर्गीय और वीआईपी क्षेत्रों में भी पानी की कमी महसूस की जा रही है।
सरकार ने अल-नीनो के संभावित प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंका को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बांधों और प्रमुख जलाशयों के पानी को प्राथमिक रूप से पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जबकि गैर-जरूरी उपयोग और सिंचाई संबंधी कार्यों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाएगा।
जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। बीएमसी ने मुंबई क्षेत्र के लगभग 350 पुराने खुले कुओं और बावड़ियों की सफाई, गाद निकासी और जल शुद्धिकरण की योजना शुरू की है। इन स्रोतों के पानी का उपयोग बागवानी, सड़क सफाई और अन्य गैर-पेयजल कार्यों में किया जाएगा, ताकि झीलों से मिलने वाले पेयजल पर दबाव कम किया जा सके।
ठाणे और नई मुंबई नगर निगमों ने भी भूजल स्तर बढ़ाने और स्थानीय जल स्रोतों को सक्रिय करने के लिए वार्ड स्तर पर विशेष टीमें गठित की हैं। अधिकारियों का मानना है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने तक ये पारंपरिक जल स्रोत टैंकरों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस बीच राज्य सरकार और बीएमसी ने नागरिकों से पानी का अत्यंत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की अपील की है, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम संरक्षण किया जा सके।