दैनिक खबरनामा | लुधियाना, 26 जून 2026. अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के स्वास्थ्य, नशामुक्ति उपचार और पुनर्वास सेवाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। लुधियाना में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी), पंजाब जेल विभाग और विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मिलकर कैदियों के स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत राज्य सरकार नशा पीड़ितों के उपचार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने नशे की लत से जूझ रहे लोगों को अपराधी नहीं, बल्कि मरीज मानते हुए पिछले एक वर्ष तीन महीनों में 10 हजार से अधिक नशा पीड़ितों को जेल भेजने की बजाय नशा मुक्ति केंद्रों में उपचार उपलब्ध कराया है।
उन्होंने बताया कि राज्य की जेलों में 25 हजार से अधिक कैदियों की हेपेटाइटिस, एचआईवी और नशे से संबंधित जांच कराई गई है। इसके अलावा जेलों में ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक, मनोवैज्ञानिक, काउंसलिंग सेवाएं और आईटीआई आधारित कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं, ताकि कैदियों को स्वस्थ जीवन और समाज में पुनर्वास का अवसर मिल सके।

जेल मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि पंजाब नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में दोष सिद्ध करने की दर में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। अब लक्ष्य केवल अपराध पर नियंत्रण नहीं, बल्कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को भी मजबूत बनाना है, जिससे नशा प्रभावित लोगों को उपचार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम में जेलों में उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों, संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, महिला कैदियों की विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं, दिव्यांग कैदियों की देखभाल तथा नशा मुक्ति उपचार जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए। यूएनओडीसी के विशेषज्ञों ने जेल स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं सर्वोत्तम वैश्विक अनुभवों की जानकारी भी दी।
दक्षिण एशिया के लिए यूएनओडीसी की आपराधिक न्याय विशेषज्ञ सीमा जोशी ने कहा कि बदलती चुनौतियों के अनुरूप नई रणनीतियां अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं, एचआईवी उपचार और नशा मुक्ति कार्यक्रमों को मजबूत करना कैदियों के पुनर्वास के साथ-साथ सुरक्षित और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने स्क्रीनिंग प्रणाली, नशा मुक्ति उपचार, मानसिक एवं सामाजिक सहायता, उपचार की निरंतरता और महिलाओं की प्रजनन एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की। अंत में सभी विभागों ने समन्वित और मानवाधिकार आधारित दृष्टिकोण अपनाकर जेलों में नशे की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने और कैदियों के पुनर्वास को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।