दैनिक खबरनामा । मुंबई, 3 जुलाई: राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी हाफ्किन बायो-फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निजी हाथों में सौंपने की कोई योजना नहीं है। विधानसभा में खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नारहरी जिरवाल ने बताया कि पहले लाए गए एक प्रस्ताव को भी इसलिए रोक दिया गया क्योंकि वैक्सीन उत्पादन में 100 साल का अनुभव रखने वाले इस उपक्रम में सिर्फ एक कंपनी ने रुचि दिखाई थी।
मंत्री जिरवाल ने सदन में कहा कि सरकार की मंशा कभी भी इस टीका निर्माता को निजी क्षेत्र को देने की नहीं रही। पहले का प्रस्ताव मुंबई स्थित हाफ्किन की इकाइयों को साझेदारी मॉडल के जरिए आधुनिक बनाने से जुड़ा था, ताकि वैक्सीन और जैविक उत्पादों का निर्माण बेहतर हो सके।
राज्य ने टीकों, रक्त उत्पादों और अन्य जैविक उत्पादों की सुविधाओं के उन्नयन के लिए केंद्र सरकार से सहयोग माँगा था। लेकिन सिर्फ एक कंपनी के आगे आने के कारण उस प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी। परेल, मुंबई स्थित यह कंपनी जीवनरक्षक दवाओं, टीकों और एंटी-वेनम बनाने के लिए जानी जाती है।
विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या सरकार नया ईओआई जारी करेगी और कथित गड़बड़ियों की तय समय में जांच कराने की मांग की। विधायकों ने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे को कंपनी की जिम्मेदारी देने का सुझाव भी दिया, जिसे मंत्री ने स्वीकार कर लिया।
मंत्री ने निजीकरण से इनकार करते हुए माना कि फिलहाल उत्पादन बंद है और संस्थान स्टाफ व फंड की कमी से जूझ रहा है। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने मांग रखी कि सरकार सदन में साफ कहे कि हाफ्किन कॉर्पोरेशन का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने 150 करोड़ रुपये देने की भी अपील की।
जिरवाल ने दोहराया कि हाफ्किन बायो-फार्मा कॉर्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में जल्द ही अधिकारियों और विधायकों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें संस्थान को मजबूत करने के कदमों पर चर्चा होगी।