दैनिक खबरनामा
4 जुलाई चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने आने के बाद नाराज नेताओं ने अब मामला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समक्ष रखने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात का समय मांगा है। इस बीच पार्टी नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से फिलहाल कोई बड़ा कदम नहीं उठाने का अनुरोध किया है।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता में तीन वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनाई गई है, जिसे हाईकमान के सामने नाराज नेताओं का पक्ष रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। असंतुष्ट नेताओं की प्रमुख मांग प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने तथा चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेशाध्यक्ष या मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की है।
इसी मुद्दे पर शुक्रवार को मोरिंडा में चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने समर्थक विधायकों, पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक में 62 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और आगे की रणनीति पर चर्चा की। सभी ने सर्वसम्मति से चन्नी को अधिकृत किया कि वे पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और नेताओं की भावनाओं से अवगत कराएं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर नई पार्टी बनाने का सुझाव भी रखा, लेकिन उपस्थित अधिकांश नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
उधर, चरणजीत सिंह चन्नी ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे, किसी अन्य दल में शामिल नहीं होंगे और न ही नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाएं हाईकमान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है और वे उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।
बताया जा रहा है कि नाराज नेताओं की समिति ने राहुल गांधी से मिलने के लिए समय का अनुरोध भी भेज दिया है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से हाईकमान ने चन्नी से संपर्क कर उनसे फिलहाल कोई बड़ा फैसला न लेने का आग्रह किया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि चरणजीत सिंह चन्नी उनके बड़े भाई जैसे हैं और पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता उनके लिए सम्माननीय हैं। वड़िंग ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उनके अनुसार मुख्यमंत्री का चेहरा तय करने का अधिकार केवल राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के पास है।
वड़िंग ने पार्टी में बगावत या गुटबाजी की बात से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता के घर पर बैठकर चर्चा करना सामान्य बात है। यदि कुछ नेताओं को किसी विषय पर आपत्ति है तो उसका समाधान हाईकमान स्तर पर किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही सभी नेता एक मंच पर एकजुट दिखाई देंगे।
अपने खिलाफ दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए वड़िंग ने कहा कि जिन लोगों ने उनके विरोध में बयान दिए हैं, उनमें से कई पहले ही पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता अनुशासन की सीमाएं लांघेगा तो पार्टी उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व चरणजीत सिंह चन्नी का सम्मान करते हैं और जब भी वे चाहेंगे, हाईकमान उनसे मुलाकात करेगा। उनका कहना था कि सभी कांग्रेस नेताओं का साझा उद्देश्य पंजाब में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनाना है।
इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अनुशासन का पालन करना आवश्यक है और सभी नेताओं को अपनी सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार पार्टी में विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उद्देश्य एक ही है।
वहीं सांसद एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस के सभी नेताओं को एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता को कोई आपत्ति है तो वह उसे पार्टी मंच पर रख सकता है, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे माहौल खराब हो। रंधावा ने कहा कि हाईकमान स्तर पर पहले भी तीन से चार बैठकें हो चुकी हैं और सभी का लक्ष्य पंजाब में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लाना होना चाहिए।