दैनिक खबरनामा। मोहाली, 11 जुलाई: डेराबस्सी में नकली आयुर्वेदिक उत्पाद बनाने और बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने यहां एक फैक्ट्री को सील कर दिया और कॉपीराइट कानून के तहत केस दर्ज किया है।
जानकारी के मुताबिक जिस यूनिट में ये नकली सामान तैयार हो रहा था, उसका ड्रग लाइसेंस 1 जून 2026 से ही निलंबित चल रहा था। बावजूद इसके वहां उत्पादन बंद नहीं हुआ था। इसकी शिकायत मिलने के बाद पुलिस और ड्रग विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की।
यह शिकायत उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित राहत हर्बल रेमेडीज के प्रोडक्शन मैनेजर ने दी थी। शिकायत में कहा गया कि उनकी कंपनी पिछले कई सालों से नूरानी तेल और राहत ब्रांड के नाम से आयुर्वेदिक दवाएं बनाती है।
आरोप है कि डेराबस्सी-बरवाला रोड पर हंसा पार्क क्षेत्र में बैठे कुछ लोगों ने कंपनी के ट्रेडमार्क, लोगो, लेबल और पैकिंग की हूबहू नकल करके नकली उत्पाद बाजार में उतार दिए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार नकली माल की वजह से कंपनी की छवि खराब हो रही है और हर महीने लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
ड्रग इंस्पेक्टर ज्योति बब्बर ने पुलिस टीम और कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मौके पर छापा मारा। जांच के दौरान भारी मात्रा में नकली पैकिंग सामग्री और लेबल बरामद किए गए। इसके बाद फैक्ट्री को तुरंत सील कर दिया गया।
पुलिस ने इस मामले में लाफिया, अर्शद, सोनिका और पीयूष सहित कई लोगों को नामजद किया है। अधिकारियों का मानना है कि नकली दवाओं की सप्लाई का यह नेटवर्क सिर्फ डेराबस्सी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य शहरों तक भी फैला हो सकता है। मामले की आगे जांच जारी है।