दैनिक खबरनामा। रायपुर, 16 जुलाई: ई-20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच छत्तीसगढ़ से एक अहम फैसला सामने आया है। रायपुर के उपभोक्ता आयोग ने ई-20 ईंधन की वजह से कार खराब होने के मामले में उपभोक्ता के पक्ष में आदेश सुनाते हुए कहा है कि वाहन निर्माता कंपनी या तो ग्राहक को नई गाड़ी उपलब्ध कराए या फिर कार की पूरी कीमत वापस करे। यह देश में ई-20 से जुड़ा पहला ऐसा उपभोक्ता अदालत का निर्णय माना जा रहा है।
पूरा मामला क्या था?
शिकायतकर्ता का कहना था कि ई-20 पेट्रोल डलवाने के बाद से उनकी कार में लगातार तकनीकी दिक्कतें शुरू हो गईं। इंजन की परफॉर्मेंस गिर गई, बार-बार मिसफायर होने लगा और माइलेज में भी गिरावट दर्ज की गई।
शिकायत में बताया गया कि इन दिक्कतों के लिए वह कई बार अधिकृत सर्विस सेंटर गए और मरम्मत भी कराई, लेकिन परेशानी जस की तस बनी रही। आखिर में इंजन से जुड़े बड़े खर्च भी करने पड़े।
इस पर कार कंपनी और डीलर ने तर्क दिया कि संबंधित मॉडल ई-20 ईंधन के साथ पूरी तरह अनुकूल है। उनका कहना था कि खराबी सामान्य घिसाव, रखरखाव में कमी या किसी अन्य कारण से हुई होगी, ईंधन की वजह से नहीं।
आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में क्यों फैसला दिया?
उपभोक्ता आयोग कंपनी की इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ग्राहक ने बार-बार अधिकृत वर्कशॉप से संपर्क कर समस्या ठीक कराने की कोशिश की, इसके बावजूद गाड़ी में वही खामियां बरकरार रहीं। बार-बार मरम्मत के बाद भी समाधान न निकलने से यह स्पष्ट होता है कि समस्या का उचित निवारण नहीं किया गया।
आयोग ने एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी उठाया कि अब ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर ई-20 पेट्रोल ही उपलब्ध है। ऐसे में वाहन चालकों के पास दूसरा विकल्प चुनने की व्यावहारिक गुंजाइश नहीं है। इसलिए उनसे यह उम्मीद करना उचित नहीं है कि वे ई-20 का उपयोग न करें।
क्या आदेश दिया गया?
शिकायत को सही मानते हुए आयोग ने निर्माता और डीलर दोनों को निर्देश दिए:
1. मरम्मत का खर्च लौटाएं – शिकायतकर्ता द्वारा इंजन पर किया गया खर्च वापस किया जाए।
2. मुआवजा दें – मानसिक पीड़ा और कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के लिए भी मुआवजे का भुगतान किया जाए।
3. समय-सीमा तय – भुगतान के लिए आयोग ने एक निश्चित समय तय किया है। यदि तय अवधि में राशि नहीं दी गई तो उस पर ब्याज भी लगेगा।
क्यों है यह फैसला अहम?
भारत सरकार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत ई-20 पेट्रोल का उपयोग तेजी से बढ़ा रही है। ऐसे में यह निर्णय उपभोक्ता अधिकार, निर्माता की जवाबदेही और वाहनों की ईंधन अनुकूलता से जुड़े कई सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश के बाद ऑटो कंपनियों और ईंधन नीति पर नई चर्चा शुरू हो सकती है।