दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 19 जुलाई: सरकारी स्कूलों में दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट लगातार गिरने के बाद पंजाब शिक्षा विभाग ने जवाबदेही तय करने की ओर बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने ऐसे 68 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी है जहां बोर्ड परीक्षा में प्रदर्शन लगातार उम्मीद से नीचे रहा है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, पहले इन सभी स्कूल प्रमुखों से उनके खराब नतीजों को लेकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया था। अब विभाग को मिले जवाबों की जांच पूरी होने के बाद अगली कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों का शैक्षणिक स्तर सुधारना स्कूल मुखिया की सीधी जिम्मेदारी है और इसमें ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
गुणवत्ता पर जोर, निगरानी तेज
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर ऊंचा करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसी के चलते नियमित निरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और मूल्यांकन के आधार पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। जिन स्कूलों ने अच्छा रिजल्ट दिया है उन्हें सराहा जाएगा, जबकि लगातार पिछड़ रहे स्कूलों के लिए विशेष सुधार कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
अधिकारी केवल परीक्षा के अंकों तक ही सीमित नहीं रहेंगे। छात्रों की हाजिरी, कक्षा में पढ़ाई का माहौल, अध्यापन की व्यवस्था और स्कूल का समग्र प्रबंधन भी जांच के दायरे में है। जरूरत पड़ने पर ऐसे स्कूलों को अकादमिक सहयोग और विशेष मार्गदर्शन भी दिया जाएगा ताकि आने वाले सत्र में परिणाम बेहतर हो सकें।
जिला स्तर पर होगी कड़ी मॉनिटरिंग
जानकारी के अनुसार विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे चिन्हित स्कूलों पर लगातार नजर रखें और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय भेजें। यदि अगले शैक्षणिक सत्र में भी इन स्कूलों के नतीजों में ठोस सुधार नहीं दिखा तो संबंधित प्रिंसिपलों और जिम्मेदार अधिकारियों पर और सख्त कार्रवाई हो सकती है।
विभाग का मानना है कि जवाबदेही तय होने से सरकारी स्कूलों में अनुशासन और पढ़ाई दोनों सुधरेंगे। इसके साथ ही छात्रों के बोर्ड परिणामों में भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित मूल्यांकन और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें।