दैनिक खबरनामा। शिमला, 21 जुलाई: हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक ने कर्ज में डूबे किसानों और ग्रामीणों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। बैंक ने आगामी 6 महीने के लिए तीन अलग-अलग वन टाइम सेटलमेंट यानी ओटीएस योजनाएं शुरू की हैं। शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बैंक अध्यक्ष संजय सिंह चौहान ने बताया कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
मुख्यमंत्री योजना के तहत 50% ब्याज माफ
चौहान ने कहा कि “मुख्यमंत्री कृषि ऋण राहत योजना” के अंतर्गत कृषि क्षेत्र से जुड़े उन लोगों को फायदा मिलेगा जिन्होंने 3 लाख रुपये तक का कर्ज लिया है। ऐसे किसानों के बकाया ब्याज में 50 फीसदी की छूट दी जाएगी। प्रदेश के करीब 6319 किसान इस योजना के दायरे में आएंगे। यह योजना आज से शुरू होकर अगले छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
2016 तक के एनपीए खातों पर 25% छूट
बैंक ने बताया कि 2016 तक के पुराने गैर-निष्पादित यानी एनपीए खातों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। जिन खातों की प्रोविजनिंग बैंक पहले ही नाबार्ड को दे चुका है, उन पर ब्याज में 25 फीसदी तक की राहत मिलेगी।
तीनों ओटीएस योजनाएं छह महीने की अवधि के लिए लागू रहेंगी। इस दौरान बैंक के कर्मचारी गांव-गांव जाकर लोगों को योजनाओं की जानकारी देंगे और आवेदन में मदद करेंगे।
घाटे से उबरकर नंबर-1 बना बैंक
संजय सिंह चौहान ने कहा कि बीते 10 साल से घाटे में चल रहा यह बैंक पिछले तीन वर्षों में मुनाफे में आ गया है। इसका श्रेय मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन और बैंक कर्मचारियों की मेहनत को जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल राज्य सरकार ने बैंक को 400 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी थी। सख्त वसूली, कर्मचारियों की पदोन्नति और ट्रांसफर नीति में सुधार के कारण बैंक की बैलेंस शीट मजबूत हुई है। जमा के मामले में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि बैंक अब पूरे देश में पहले स्थान पर है।
बैंक का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग इन योजनाओं का लाभ लेकर अपने पुराने खातों का निपटारा करें और आर्थिक रूप से फिर से पटरी पर लौटें।