दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली/ढाका, 5 अगस्त : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि परिस्थितियों के कारण उन्हें देश छोड़ना पड़ा, लेकिन बांग्लादेश की जनता के साथ उनका रिश्ता आज भी पहले की तरह मजबूत है। नई दिल्ली से मीडिया के साथ वर्चुअल संवाद में उन्होंने कहा कि उनका पूरा राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन देशवासियों के बीच बीता है और वह आज भी स्वयं को उनके साथ खड़ा महसूस करती हैं।
वर्चुअल संवाद के दौरान उनके बेटे सजीब वाजेद और अवामी लीग के वरिष्ठ नेताओं ने भी मौजूदा अंतरिम सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए तथा देश की राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई।
2024 आंदोलन में मौतों के आंकड़ों पर सवाल
सजीब वाजेद ने वर्ष 2024 के आंदोलन के दौरान हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने आंदोलन में 1,400 लोगों की मौत का उल्लेख किया है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मृतकों की संख्या 800 से कुछ अधिक दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि अवामी लीग और पार्टी के वकीलों ने कई बार संयुक्त राष्ट्र से अतिरिक्त 600 मृतकों की सूची उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, लेकिन अब तक यह जानकारी साझा नहीं की गई।
कानून पर उठाए सवाल
वाजेद ने आरोप लगाया कि सत्ता संभालने के बाद मौजूदा सरकार ने ऐसा कानून लागू किया, जिसके तहत आंदोलन में शामिल लोगों को व्यापक कानूनी संरक्षण दिया गया। उनके अनुसार, इस प्रावधान के कारण आंदोलन से जुड़े मामलों में, चाहे पीड़ित आम नागरिक हों, पुलिसकर्मी हों या अवामी लीग के कार्यकर्ता, न्यायिक कार्रवाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे कानून के शासन और मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के विपरीत बताया।
अवामी लीग ने जताई चिंता
अवामी लीग के नेता मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल ने कहा कि उनकी सरकार हटाए जाने के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि उस समय भेदभाव-मुक्त बांग्लादेश का वादा किया गया था, लेकिन वर्तमान में देश राजनीतिक ध्रुवीकरण, अस्थिरता और अराजकता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी में वृद्धि हुई है, जबकि महिलाओं, बच्चों, पत्रकारों, वकीलों, कारोबारियों तथा धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं भी बढ़ी हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने पर जोर
नोफेल ने कहा कि अवामी लीग ऐसे बांग्लादेश की पक्षधर है, जहां राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से हो। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को कानून के समक्ष समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं और नागरिक अधिकारों की रक्षा ही देश में स्थिरता और जनविश्वास बहाल करने का आधार बन सकती हैं।
जनता से जुड़े रहने की बात दोहराई
अपने संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि देश से बाहर रहने के बावजूद उनका मन हमेशा बांग्लादेश की जनता के साथ है। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी देशवासियों के अधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों और उनके हितों की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाती रहेंगी।