दैनिक खबरनामा ब्यूरो। मैड्रिड, 5 अगस्त: सोशल मीडिया पर फैली भ्रामक सूचनाओं और वायरल वीडियो ने स्पेन के उत्तर अफ्रीकी एन्क्लेव स्यूटा (Ceuta) में बड़े पैमाने पर प्रवासियों के प्रवेश की कोशिश को हवा दे दी। पिछले सप्ताह कुछ दर्जन युवाओं से शुरू हुआ यह सिलसिला देखते ही देखते हजारों लोगों की भीड़ में बदल गया, जिसमें 80 से अधिक लोगों की डूबने या भगदड़ में कुचलने से मौत हो गई।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले गुरुवार तक हजारों लोग समुद्र के रास्ते तैरकर स्यूटा पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कई लोगों की जान चली गई, जबकि बड़ी संख्या में अन्य लोगों को बचाया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस घटनाक्रम की एक बड़ी वजह तीन सप्ताह पहले स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय का वह फैसला बना, जिसमें कहा गया था कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को स्यूटा और मेलिला की सीमा से तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बाद में उनकी त्वरित वापसी नहीं की जा सकती।
लेकिन सोशल मीडिया पर इस फैसले को गलत तरीके से पेश किया गया। कई पोस्ट और वीडियो में दावा किया गया कि जो भी व्यक्ति समुद्र या जमीन के रास्ते स्यूटा पहुंच जाएगा, उसे वापस नहीं भेजा जाएगा। इन दावों ने बड़ी संख्या में लोगों को सीमा पार करने के लिए प्रेरित किया।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में जर्मनी की सड़क पर खड़ा एक युवा मोरक्को निवासी लोगों से कहता दिखाई दिया, “जो लोग कहते हैं कि स्यूटा पहुंचने पर तुम्हें वापस भेज दिया जाएगा, उन पर विश्वास मत करो। तुम्हें वापस नहीं भेजा जाएगा।” बाद में यह वीडियो हटा दिया गया, लेकिन अन्य खातों से दोबारा साझा किया गया।
इसके अलावा, 7 जुलाई के बाद से मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई पोस्ट में यह झूठा दावा भी किया गया कि स्पेन की अवैध प्रवासियों को नियमित दर्जा देने की योजना 30 जुलाई को समाप्त होने वाली है। इनमें से एक पोस्ट को 28 हजार से अधिक लाइक मिले। इसी तरह के संदेश 30 जुलाई की सुबह भी व्यापक रूप से प्रसारित हुए।
वास्तविकता यह थी कि यह योजना केवल उन अनियमित प्रवासियों के लिए थी, जो वर्ष 2025 के अंत से कम से कम पांच महीने पहले से स्पेन में रह रहे थे। ऐसे लोग अप्रैल से 30 जून के बीच आवेदन कर सकते थे। स्पेन सरकार को अनुमानित पांच लाख के मुकाबले दोगुने से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे और आवेदन की समय-सीमा कभी नहीं बढ़ाई गई।
घटना के बाद स्यूटा की ओर बढ़ने के लिए लोगों को उकसाने वाले अधिकांश वीडियो और ऑनलाइन समूह हटा दिए गए हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया पर फैली गलत जानकारी ने इस त्रासदी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।