दैनिक खबरनामा ब्यूरो। ढाका 5 अगस्त : बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए बयानों ने एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों और बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हसीना ने वर्ष के अंत तक बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है, जबकि उनके विरोधियों का आरोप है कि भारत उनकी वापसी के मुद्दे का इस्तेमाल ढाका सरकार पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है।
78 वर्षीय शेख हसीना ने जुलाई में भारत से दिए एक संदेश में कहा कि उन्हें अपनी संभावित गिरफ्तारी, जेल या मौत की सजा का पूरा अंदाजा है, लेकिन वह अपने समर्थकों के आह्वान पर स्वदेश लौटना चाहती हैं। बुधवार को, देश छोड़ने की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर, वह नई दिल्ली में आयोजित “शेख हसीना की घर वापसी” कार्यक्रम को टेलीफोन के माध्यम से संबोधित करने वाली हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हसीना की वापसी की घोषणा केवल व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है। उनका उद्देश्य प्रतिबंधित हो चुकी अवामी लीग के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना, पार्टी को फिर से सक्रिय करना और बांग्लादेश की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना हो सकता है।
ढाका स्थित नॉर्थ साउथ यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मोहम्मद जलाल उद्दीन सिकदर का कहना है कि अवामी लीग के अस्तित्व के लिए शेख हसीना अब भी सबसे बड़ा प्रतीक हैं। वहीं पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि हसीना अपने समर्थकों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी महसूस करती हैं और उनकी वापसी पार्टी के प्रति निष्ठा का प्रतिफल होगी।
हालांकि, अवामी लीग के पूर्व वरिष्ठ नेता और अब हसीना के आलोचक महमूदुर रहमान मन्ना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे कई नेता हैं जिन्हें जनता का समर्थन हासिल है, लेकिन हसीना ने उन्हें आगे आने का अवसर नहीं दिया। उनके अनुसार, पार्टी के हित में वापसी की दलील वास्तविकता से अधिक राजनीतिक संदेश है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि हसीना की वापसी की चर्चा प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास हो सकती है। फरवरी में हुए आम चुनाव में अवामी लीग पर प्रतिबंध होने के कारण पार्टी चुनाव नहीं लड़ सकी थी और रहमान के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई।
दूसरी ओर, बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह शेख हसीना का सामना कानूनी प्रक्रिया के तहत करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने कहा कि सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया है और यदि वह लौटती हैं तो उन्हें कानून के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।
शेख हसीना ने ढाका में चल रहे मुकदमे में हिस्सा नहीं लिया था। अदालत ने उन्हें 2024 के जनआंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने, हत्याओं के आदेश देने और मानवता के विरुद्ध अपराधों को रोकने में विफल रहने जैसे मामलों में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। हालांकि, हसीना और उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते रहे हैं।
हसीना की वापसी का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भारत और बांग्लादेश हाल के महीनों में अपने संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली में आयोजित “शेख हसीना की घर वापसी” कार्यक्रम से भारत सरकार का कोई संबंध नहीं है और न ही वह उसमें व्यक्त किए जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।
इसके बावजूद बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत हसीना के मुद्दे को रणनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। “भारत ‘हसीना कार्ड’ खेलकर बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।”
शेख हसीना की संभावित वापसी और उससे जुड़े राजनीतिक संकेत आने वाले महीनों में न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।