दैनिक खबरनामा | 7 अगस्त | रांची: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सर्विस परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से अवैध वसूली के मामले में सीआईडी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। विशेष जांच टीम ने गिरिडीह जिले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी के ससुर विकास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
हथबोर गांव में छापेमारी, घंटों हुई पूछताछ
सीआईडी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के हथबोर गांव स्थित विकास पांडेय के आवास पर छापा मारा। विकास पांडेय स्थानीय सरकारी स्कूल में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। टीम ने उनसे कई घंटे तक पूछताछ की और इसके बाद आगे की जांच के सिलसिले में उन्हें अपने साथ ले गई।
जांच एजेंसी की नजर अभय तिवारी के दोनों सालों पर भी है। दोनों विकास पांडेय के पुत्र हैं। सीआईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद से दोनों के फरार होने की जानकारी सामने आई है।
विदेश भागने का शक, यात्रा दस्तावेजों की जांच
जांच एजेंसियों को आशंका है कि कार्रवाई से बचने के लिए दोनों विदेश जा सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उनके यात्रा दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों फिलहाल कहां हैं और देश से बाहर गए हैं या नहीं।
इसी के साथ सीआईडी और वित्तीय खुफिया शाखा ने आरोपी परिवार की आर्थिक गतिविधियों और अचल संपत्तियों की जांच भी तेज कर दी है।
करोड़ों के अस्पताल से लेकर लग्जरी फ्लैट तक, संपत्तियों का हिसाब खंगाला जा रहा
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम देवघर में निर्माणाधीन करोड़ों रुपये के अस्पताल, रांची में खरीदी गई जमीनों, तीन लग्जरी फ्लैट और गिरिडीह सहित दूसरे जिलों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है।
एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन संपत्तियों की खरीद और निर्माण में इस्तेमाल रकम कहां से आई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संपत्तियों में लगाया गया पैसा परिवार की घोषित और वैध आय से मेल खाता है या नहीं।
सरकारी पदों पर तैनाती ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
मामले की जांच के दौरान आरोपी परिवार के कई सदस्यों के महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर होने की जानकारी भी सामने आई है। मुख्य आरोपी अभय तिवारी दुमका के पोड़ैयाहाट में मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। उसने 14वीं JPSC PT परीक्षा भी पास की है। वहीं उसकी पत्नी रांची में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के पद पर तैनात है।
परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के भी अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी सेवाओं में चयनित होने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद प्रशासनिक और सरकारी महकमे में इस मामले को लेकर हलचल बढ़ गई है।
OMR में हेरफेर और ‘सेटिंग’ के नेटवर्क की जांच
सीआईडी को आशंका है कि JPSC और JPSC CGL जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर OMR शीट में कथित हेरफेर और ‘सेटिंग’ कराने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
अब जांच का एक अहम हिस्सा इस कथित नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को सामने लाना है। यदि वित्तीय जांच में आय से अधिक संपत्ति या अवैध लेनदेन के ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े अन्य प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।