दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 12 अगस्त: देश के मुख्य न्यायाधीश की “कॉकरोच” संबंधी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर “कॉकरोच जनता पार्टी” यानी सीजेपी अचानक चर्चा में आई। इसी संगठन ने हाल में नीट पेपर लीक को लेकर जेन-जी प्रदर्शन भी किए थे। अब करीब तीन महीने बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब तलब किया है।
याचिका में मांग की गई है कि उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो जिन्होंने वर्चुअल सुनवाई के वीडियो को काट-छांट कर सीजेआई के शब्दों का व्यावसायिक इस्तेमाल किया और उन्हें ऐसा अर्थ दे दिया जो मूल रूप से था ही नहीं।
याचिकाकर्ता ने अदालत में क्या दलील दी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने लगभग 30 मिनट तक बहस हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वकील राजा चौधरी ने कहा कि 15 मई को हुई न्यायिक कार्यवाही में एकदम अलग संदर्भ में बोले गए “कॉकरोच” शब्द को जानबूझकर चुनकर, एडिट करके पेश किया गया। उनका आरोप है कि इसका मकसद न्यायपालिका की गरिमा घटाना और संस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाना था, साथ ही इससे कमाई भी की गई।
चौधरी ने मांग की कि ऐसे सभी व्यक्ति या समूहों की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाए जो अदालत की टिप्पणियों और उदाहरणों — जिसमें सीजेपी की गतिविधियां भी शामिल हैं — को पैसा कमाने, ट्रेडमार्क हथियाने या बिना अनुमति व्यावसायिक तौर पर फैलाने में लगे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के दायरे में निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक विरोध, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की आजादी की जगह है, लेकिन उसकी सीमा यह है कि उससे न्यायिक संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस न पहुंचे।
“बयान को गलत संदर्भ में चलाया गया”
“संजय दुबे बनाम दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल” मामले की 15 मई की सुनवाई का हवाला देते हुए वकील ने बताया कि सीजेआई ने “कॉकरोच” शब्द का प्रयोग नकली वकीलों के लिए किया था। उस दिन उन्होंने कोर्ट की प्रक्रिया के दुरुपयोग, पेशेवर मानकों में गिरावट और इससे न्याय व्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी।
“रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं”
चौधरी ने पीठ को बताया कि 15 मई के बाद से अदालती कार्यवाही के चुनिंदा और काटे-छांटे हुए क्लिप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार, सुनवाई के दौरान कही गई बातों को तोड़-मरोड़कर मीम बनाए जा रहे हैं और उन्हें मुनाफे के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और न्यायाधीशों की छवि खराब करके जनता का भरोसा कमजोर करने की इन हरकतों को रोकने के लिए अभी कोई ठोस तंत्र मौजूद नहीं है।
इन्हीं बिंदुओं पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।