दैनिक खबरनामा | 13 अगस्त | नई दिल्ली: बच्चे के जीवन के शुरुआती महीनों में उसका सही पोषण बेहद महत्वपूर्ण होता है। छह महीने की उम्र पूरी होने के बाद जब शिशु को धीरे-धीरे ठोस और पूरक आहार देना शुरू किया जाता है, तब माता-पिता के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि भोजन में किन पौष्टिक चीजों को शामिल किया जा सकता है। इस दौरान भोजन का उद्देश्य केवल बच्चे का पेट भरना नहीं, बल्कि उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराना भी होता है।
बच्चे के मस्तिष्क का विकास केवल खान-पान पर निर्भर नहीं करता। पर्याप्त नींद, खेल, माता-पिता से बातचीत, आसपास का वातावरण और देखभाल भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, संतुलित और पोषक आहार बच्चे के विकास को बेहतर आधार दे सकता है। छह महीने के बाद कुछ खाद्य पदार्थों को उम्र और निगलने की क्षमता के अनुसार उसकी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
अखरोट की प्यूरी या बारीक पाउडर
अखरोट को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसमें हेल्दी फैट्स के साथ प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड भी पाया जाता है, जो शरीर और मस्तिष्क के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड भी मौजूद होते हैं।
छह महीने के बाद बच्चे को अखरोट साबुत या बड़े टुकड़ों में देने से बचना चाहिए। इसे हल्का भूनकर बेहद बारीक पाउडर बनाया जा सकता है। इस पाउडर की थोड़ी मात्रा बच्चे के दलिया, दही या फल की प्यूरी में मिलाकर दी जा सकती है।
साबुत मेवे या बड़े टुकड़े छोटे बच्चों में चोकिंग का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए भोजन की बनावट बच्चे की उम्र और निगलने की क्षमता के अनुरूप रखना जरूरी है। किसी नए खाद्य पदार्थ की शुरुआत करते समय एलर्जी के संभावित संकेतों पर भी नजर रखनी चाहिए।
अंडा भी हो सकता है पौष्टिक विकल्प
अंडे को भी छह महीने के बाद बच्चे के पूरक आहार में शामिल किया जा सकता है। इसमें प्रोटीन के अलावा कई जरूरी विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं। अंडे की जर्दी में मौजूद कोलीन शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में योगदान देता है और मस्तिष्क तथा तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है।
बच्चे को अंडा देते समय उसे पूरी तरह पकाना जरूरी है। उबले हुए अंडे को अच्छी तरह मैश करके एवोकाडो या किसी अन्य नरम खाद्य पदार्थ के साथ मिलाकर बच्चे को दिया जा सकता है। भोजन की बनावट ऐसी होनी चाहिए, जिसे बच्चा आसानी से निगल सके।
राजगीरा से मिलेंगे कई जरूरी पोषक तत्व
राजगीरा भी शिशु के पूरक आहार में शामिल किया जा सकने वाला विकल्प है। इसमें प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयरन बच्चे की सामान्य वृद्धि और शरीर की जरूरी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि प्रोटीन शरीर के ऊतकों के निर्माण और विकास में भूमिका निभाता है।
बच्चे के लिए राजगीरा बनाते समय इसे अच्छी तरह पकाकर पूरी तरह नरम करना चाहिए। इसमें अच्छी तरह मैश की हुई सब्जियां मिलाई जा सकती हैं। भोजन का स्वाद हल्का मीठा करने के साथ अतिरिक्त पोषक तत्व जोड़ने के लिए इसमें शकरकंद या सेब की प्यूरी भी मिलाई जा सकती है।
बच्चे के मस्तिष्क और शरीर के बेहतर विकास के लिए छह महीने के बाद अलग-अलग पौष्टिक खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे आहार में शामिल करना उपयोगी होता है, ताकि उसे विभिन्न पोषक तत्व मिल सकें। हालांकि, पूरक आहार शुरू होने के बाद भी मां का दूध शिशु के लिए महत्वपूर्ण बना रहता है और ठोस भोजन को इसके साथ धीरे-धीरे डाइट में शामिल किया जाता है।