दैनिक खबरनामा। कोलकाता, 14 अगस्त: सेंसस 2027 के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के राज्य शिक्षा विभाग के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
न्यायमूर्ति कृष्णा राव की पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जिन शिक्षकों को रोजाना 40 किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाना पड़ता है और जो शनिवार को भी स्कूल ले रहे हैं, उनसे सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कक्षाएं करवाने के बाद जनगणना जैसा श्रमसाध्य काम करवाना व्यावहारिक नहीं है।
पीठ ने सीधे पूछा कि शिक्षकों को इस काम में लगाने से पहले उनके सेवा रिकॉर्ड और घर से स्कूल की दूरी का कोई मूल्यांकन किया गया था या नहीं।
इस पर राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि जनगणना एक अहम राष्ट्रीय प्रक्रिया है और यह पूरे देश में चल रही है। इस दलील पर न्यायमूर्ति राव ने वैकल्पिक तरीका सुझाया। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों को एक साथ इस काम में लगाने के बजाय रोटेशन प्रणाली अपनाई जाए। हर स्कूल से बारी-बारी से 4-5 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाए ताकि पढ़ाई पर असर न पड़े।
अदालत ने याचिकाकर्ता शिक्षकों के इस पक्ष को भी दर्ज किया कि यदि उन्हें आधिकारिक रूप से ‘ऑन ड्यूटी’ माना जाए तो वे जनगणना का कार्य करने के लिए तैयार हैं।
मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह शिक्षकों की दिक्कतों को दूर करने को लेकर अपना स्पष्ट पक्ष रखे।