दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 24 सितंबर: मोहाली स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल की गई है। संस्थान अब शोधकर्ताओं के लिए 24 घंटे खुलने वाली इनोवेशन लैब शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही पंजाब के लिए 48 घंटे पहले सटीक मौसम का पूर्वानुमान देने वाले सेंटर की भी शुरुआत होगी।
इन दोनों केंद्रों का उद्घाटन IISER मोहाली के 20वें स्थापना दिवस के अवसर पर 27 सितंबर को इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे करेंगे।
प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में IISER के निदेशक डॉ. अनिल के. त्रिपाठी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान अपने स्थापना के दो दशक पूरे होने पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
कार्यक्रम के तहत 26 सितंबर को विद्यार्थियों को IISER की प्रयोगशालाओं का भ्रमण करवाया जाएगा, जबकि 27 सितंबर को मुख्य समारोह में INSA अध्यक्ष प्रो. शेखर मांडे कैंपस में मौजूद रहेंगे। इस दौरान संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं, दो दशकों में विकसित की गई तकनीकों और शोध कार्यों की जानकारी भी दी जाएगी।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि देश के सात IISER संस्थानों में मोहाली केंद्र का शोध कार्य और पेटेंट अप्रूवल का डेटा सबसे बेहतर है। उन्होंने बताया कि IISER मोहाली में छह विभाग हैं, जहां 125 विशेषज्ञ शिक्षण और शोध स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं, जबकि 74 कर्मचारी गैर-शिक्षण स्टाफ के तौर पर काम कर रहे हैं। कैंपस में वर्तमान में 1890 विद्यार्थी हैं, जो अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट से लेकर औद्योगिक शोध तक में जुटे हुए हैं।
शोध को मिलेगी नई रफ्तार
निदेशक ने बताया कि 20वें स्थापना दिवस पर शुरू हो रही इनोवेशन लैब का उद्देश्य शोध को गति देना है। उनके अनुसार, शोध के लिए मानसिक शांति और पर्याप्त समय की जरूरत होती है, जिसमें कई बार शोधकर्ता दिन-रात का फर्क भी भूल जाता है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में इंडस्ट्री को भी जगह दी गई है ताकि शोध के जरिए विकसित तकनीक को आम लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सके। इंडस्ट्री के बाद अब 24 घंटे खुलने वाली लैब की सुविधा कैंपस के शोधार्थियों को दी जा रही है, जिसे जरूरत के अनुसार ट्राइसिटी के अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ जोड़कर भी संचालित किया जाएगा।
मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी पहले
वेदर फोरकास्टिंग पर जानकारी देते हुए डॉ. अनिल ने बताया कि संस्थान के शोध के बाद ही पंजाब में पराली जलाने से दिल्ली में होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने में मदद मिली थी।
इसी दिशा में अब मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए एक नई तकनीक तैयार की गई है, जो 48 घंटे पहले मौसम का अपडेट देगी। फिलहाल इस तकनीक का उपयोग पंजाब और हिमालयी क्षेत्र में किया जा रहा है और इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। सफल होने पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर और विदेशों के लिए भी लॉन्च किया जा सकता है।
हैकाथॉन और फैलोशिप की तैयारी
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि शोधार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए IISER हैकाथॉन शुरू करने जा रहा है। शुरुआत में यह हैकाथॉन कैंपस के विद्यार्थियों के लिए होगा, जिसे बाद में ट्राइसिटी और फिर देश भर में विस्तारित किया जाएगा।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देने के लिए तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्रों को डॉ. मनमोहन सिंह फैलोशिप देने की भी योजना बनाई जा रही है।