दैनिक खबरनामा चंडीगढ़, 22 अक्टूबर 2026: पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से ‘कंटिन्यूम – द कंटिन्यूटी ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीजीआईएमईआर के रोट्टो नॉर्थ ने अस्पताल प्रशासन विभाग के सहयोग से एपीसी ऑडिटोरियम में इस सतत चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. विवेक लाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर प्रो. विवेक लाल ने कहा कि गहरे दुख के समय अपने प्रियजन के अंगदान का निर्णय लेने वाले परिवार असाधारण साहस और मानवता का परिचय देते हैं। उनका यह त्याग दूसरों को नया जीवन देने का आधार बनता है और ऐसे परिवारों के प्रति समाज को गहरा आभार व्यक्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अंगदान को केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक सामाजिक आंदोलन बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए गांवों, पंचायतों और समुदायों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करना होगा, ताकि अधिक से अधिक लोग अंगदान के महत्व को समझ सकें और इस नेक पहल से जुड़ें।
अंगदान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : प्रो. अशोक कुमार
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल पीजीआईएमईआर के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि अंगदान किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे संस्थान का सामूहिक दायित्व है। मृतक अंगदान की प्रक्रिया में संभावित दानदाताओं की समय पर पहचान, मस्तिष्क स्तंभ मृत्यु का प्रमाणन, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और शोकग्रस्त परिवारों से संवेदनशील संवाद बेहद महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि व्यवस्थित कार्यप्रणाली और स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों से अंगदान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के माध्यम से नया जीवन मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
हर महीने प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना
रोट्टो नॉर्थ के नोडल अधिकारी डॉ. विजय टाडिया ने कहा कि ‘कंटिन्यूम’ कार्यक्रम का उद्देश्य रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को प्रशिक्षित करना तथा प्राप्त ज्ञान को व्यावहारिक कार्यों में बदलना है। उन्होंने बताया कि पीजीआईएमईआर में मृतक अंगदान की प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्वास्थ्यकर्मियों के निरंतर प्रशिक्षण के लिए हर महीने ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की परिकल्पना की गई है।
सुरिंदर कौर के परिवार को किया सम्मानित
कार्यक्रम का भावुक क्षण युवा अंगदाता सुरिंदर कौर के परिवार का सम्मान रहा। परिवार ने निजी दुख की घड़ी में अंगदान का निर्णय लेकर दूसरे लोगों को जीवन का अवसर देने में योगदान दिया।
सुरिंदर कौर के चाचा जसपाल सिंह ने परिवार की भावनाएं साझा करते हुए कहा कि किसी प्रियजन को खोने की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन यह जानना कि उनके अंग दूसरों को जीवन देने में मदद कर सकते हैं, इस दुख को एक गहरा अर्थ देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुरिंदर कौर का अंगदान अन्य परिवारों को भी इस दिशा में प्रेरित करेगा।
दृष्टिबाधित संस्थान के विद्यार्थियों ने दी विशेष प्रस्तुति
कार्यक्रम में दृष्टिबाधित संस्थान के विद्यार्थियों ने अंगदान को समर्पित विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। प्रस्तुति के माध्यम से मानवता, संवेदना और दूसरों के जीवन को बचाने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही अंगदान पर आधारित एक प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसे स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
विशेषज्ञों ने अंगदान और प्रत्यारोपण के विभिन्न पहलुओं पर दी जानकारी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के बाद वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पीजीआईएमईआर के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने अंगदान और प्रत्यारोपण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की।
न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश छाबड़ा ने संभावित अंगदाताओं की पहचान और रोग की संभावित स्थिति के आकलन पर विचार रखे। रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने दानदाता से प्राप्त अंग को जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाने, अंग आवंटन और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पर चर्चा की।
फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रो. वाई.एस. बंसल ने अंगदान के कानूनी और नैतिक पहलुओं पर प्रकाश डाला, जबकि एनेस्थीसिया एवं इंटेंसिव केयर विभाग की प्रमुख प्रो. काजल जैन ने अंगदाता के स्वास्थ्य और अंगों की स्थिति को बेहतर बनाए रखने से संबंधित जानकारी दी।
न्यूरोलॉजी विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. आस्था टक्कर कपिला ने मस्तिष्क स्तंभ मृत्यु के निदान और प्रमाणन की प्रक्रिया समझाई। डॉ. विजय टाडिया ने भारत में अंगदान एवं प्रत्यारोपण की स्थिति पर जानकारी दी। वहीं, प्रत्यारोपण समन्वयक डॉ. नवदीप बंसल और डॉ. पारुल गुप्ता ने अस्पताल में अंगदान की कार्यप्रणाली तथा रेजिडेंट डॉक्टरों की भूमिका के माध्यम से अंगदान के अनुकूल वातावरण तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान रोट्टो नॉर्थ, पीजीआईएमईआर की सलाहकार (सूचना, शिक्षा एवं संचार/मीडिया) सरयू डी. मद्रा ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की ऐसी मिसाल है, जो दुख को उम्मीद में बदलकर दूसरों को जीवन का दूसरा अवसर देती है। सामूहिक प्रतिबद्धता, जागरूकता और संवेदनशीलता से प्रत्येक अंगदाता की विरासत को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलजीत देसवाल और डॉ. पारुल गुप्ता ने किया। इसमें विभिन्न विभागों के प्रमुखों, वरिष्ठ संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और अस्पताल कर्मचारियों ने भाग लिया। रोट्टो नॉर्थ की टीम ने कार्यक्रम के आयोजन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के माध्यम से अंगदान की प्रक्रिया में बेहतर समन्वय, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और आम जनता में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे अधिक से अधिक मरीजों को जीवन का नया अवसर मिल सके।