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दैनिक खबरनामा | 22 अक्टूबर | देहरादून।

उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में बड़े भूकंप के खतरे को लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। एक नए शोध के अनुसार, जमीन के नीचे भारतीय और तिब्बती प्लेटों के बीच लगातार दबाव बन रहा है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि भविष्य में इस दबाव के अचानक बाहर निकलने से 8.1 तीव्रता तक का भूकंप आ सकता है। हालांकि, भूकंप कब आएगा, इसकी सटीक तारीख बताना संभव नहीं है।

यह संयुक्त शोध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे, अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मैक्सिको और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के वैज्ञानिकों ने किया है।

जमीन के नीचे क्यों बढ़ रहा है भूकंप का खतरा?

धरती की ऊपरी सतह कई बड़ी प्लेटों से बनी है, जो लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। भारतीय प्लेट हर साल करीब 18 मिलीमीटर उत्तर की ओर बढ़ रही है। लेकिन उत्तराखंड के नीचे मौजूद मेन हिमालयन थ्रस्ट (MHT) नामक भूगर्भीय फॉल्ट का लगभग 115 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा फंसा हुआ है।

सरल शब्दों में समझें तो प्लेटें आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनके बीच फंसे हिस्से में आसानी से हलचल नहीं हो पा रही। इससे जमीन के भीतर दबाव जमा होता रहता है। शोध के मुताबिक, हिमालय का ऊपरी हिस्सा हर साल लगभग 4 से 6 मिलीमीटर ऊंचा उठ रहा है।

वैज्ञानिकों ने इस स्थिति की तुलना खिंचे हुए रबर बैंड से की है। जब दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और जमीन का फंसा हुआ हिस्सा अचानक खिसकता है, तो शक्तिशाली भूकंप आ सकता है।

गढ़वाल और कुमाऊं पर विशेष नजर

शोधकर्ताओं के अनुसार, उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के नीचे जमीन की प्लेटों के बीच मजबूत दबाव बना हुआ है। इस इलाके को सेंट्रल हिमालयन सिस्मिक गैप भी कहा जाता है। यहां पिछले कई सौ वर्षों से कोई बहुत बड़ा भूकंप नहीं आया है।

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने भी हिमालयी क्षेत्र में 7.5 से 8 तीव्रता के भूकंप की आशंका जताई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भूकंप किसी तय दिन या समय पर जरूर आएगा। फिलहाल वैज्ञानिक संभावित खतरे और जमीन के भीतर जमा दबाव का अध्ययन कर रहे हैं।

दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और पटना तक हो सकता है असर

अगर हिमालयी क्षेत्र में बहुत शक्तिशाली भूकंप आता है, तो उसका असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रह सकता। गंगा-यमुना के मैदानी इलाकों में भी तेज झटके महसूस हो सकते हैं।

दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और पटना जैसे बड़े शहरों में घनी आबादी और बड़ी संख्या में इमारतें होने के कारण नुकसान का जोखिम गंभीर हो सकता है। शोध में बताया गया है कि इंडो-गंगेटिक प्लेन में देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है।

आम लोग क्या सावधानी बरतें?

भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

  • मजबूत मकान बनवाएं: निर्माण के दौरान भूकंपरोधी नियमों का पालन करें।
  • पुरानी इमारतों की जांच कराएं: कमजोर मकानों, स्कूलों और अस्पतालों को जरूरत के अनुसार मजबूत किया जाए।
  • भूकंप के समय घबराएं नहीं: घर के अंदर हों तो मजबूत मेज के नीचे बैठें, सिर और गर्दन को बचाएं तथा खिड़कियों से दूर रहें।
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें: झटके रुकने पर सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलें, यदि ऐसा करना सुरक्षित हो।
  • आपातकालीन सामान तैयार रखें: टॉर्च, प्राथमिक उपचार किट, जरूरी दवाइयां, पानी और जरूरी संपर्क नंबर अपने पास रखें।

जनहित में जरूरी बात

वैज्ञानिकों की यह चेतावनी संभावित भूकंप के खतरे को समझने और तैयारी बढ़ाने के लिए है, न कि किसी निश्चित तारीख पर भूकंप आने की घोषणा। लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए।

समय रहते सावधानी, सुरक्षित निर्माण और बेहतर तैयारी ही बड़े भूकंप की स्थिति में नुकसान कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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