30 नवंबर तक गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे कृषि वैज्ञानिक; संतुलित खाद, फसल चक्र और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर।
दैनिक खबरनामा। करनाल, 22 अक्टूबर : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी से देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने किसानों से रासायनिक खादों और कीटनाशकों का संतुलित इस्तेमाल करने, मिट्टी की सेहत सुधारने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि धरती को बंजर होने से बचाना राष्ट्रीय जिम्मेदारी है और खेती के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना भी जरूरी है।
चौहान ने घोषणा की कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशभर में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ और संबंधित संस्थानों के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को मिट्टी के संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ खेती के तरीकों के प्रति जागरूक करेंगे।
‘ज्यादा खाद डालने से नहीं बढ़ती पैदावार’
किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सस्ती खाद उपलब्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल करें। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक की उर्वरक सब्सिडी देकर किसानों को राहत प्रदान कर रही है, लेकिन उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की जरूरत के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर खाद डालने की सलाह देते हुए कहा कि सॉइल हेल्थ कार्ड में दी गई जानकारी के अनुसार पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग किया जाए। अनावश्यक रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल जमीन की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
फसल चक्र अपनाने और प्राकृतिक खेती पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को लगातार धान-गेहूं की फसल लेने के बजाय फसल चक्र में बदलाव करने की सलाह दी। उन्होंने चना, मसूर और अरहर जैसी दलहनी फसलों को खेती में शामिल करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बेहतर करने और जमीन की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने प्राकृतिक खेती की शुरुआत कम से कम आधे एकड़ क्षेत्र से करने का सुझाव दिया। किसानों को बीजामृत और घनजीवामृत जैसे पारंपरिक जैविक कृषि उत्पादों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे खेती की लागत घटाने और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार लाने की दिशा में मदद मिल सकती है।
पराली जलाने से मिट्टी के मित्र जीवों को नुकसान
शिवराज सिंह चौहान ने पराली जलाने को मिट्टी और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताते हुए किसानों से इसके वैकल्पिक प्रबंधन को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेतों में आग लगाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद केंचुए, लाभकारी कीट तथा सूक्ष्म जीव भी प्रभावित होते हैं। ये जीव जमीन की प्राकृतिक उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने किसानों से पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने और खेतों में जैविक गतिविधियों को बनाए रखने का आग्रह किया।
ग्रीन अमोनिया से उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ग्रीन अमोनिया जैसे विकल्पों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीकों का समन्वय कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकता है।
किसानों ने लिया खेत बचाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री के आह्वान पर उपस्थित किसानों ने संतुलित खाद के इस्तेमाल, फसल चक्र में बदलाव, पराली नहीं जलाने और प्राकृतिक खेती को धीरे-धीरे अपनाने का संकल्प लिया। सम्मेलन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. मांगीलाल जाट, हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) विजेंद्र कुमार सहित कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।