दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 22 अक्टूबर : कश्मीर की खूबसूरती का लुत्फ अब सिर्फ वसंत में ट्यूलिप तक ही सीमित नहीं रहेगा। शरद ऋतु यानी पतझड़ के मौसम में भी घाटी फूलों की रंगत से गुलजार रहेगी। श्रीनगर के क्रिसेंथेमम गार्डन में लगभग 3.5 लाख गुल-ए-दाऊदी के पौधे लगाए गए हैं, जो कश्मीर के ऑटम टूरिज्म को नई पहचान देने जा रहे हैं। अगर मौसम ने साथ दिया तो इन फूलों की रौनक दिसंबर के पहले हफ्ते तक बरकरार रहेगी।
फ्लोरीकल्चर, गार्डन्स एंड पार्क्स, कश्मीर की निदेशक माथूरा मसूम ने वीरवार को जानकारी देते हुए बताया कि श्रीनगर के बॉटनिकल गार्डन में 23 अक्टूबर से क्रिसेंथेमम शो 2026 की शुरुआत होने जा रही है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शाम साढ़े चार बजे इस शो का उद्घाटन करेंगे। इसके लिए पूरे गार्डन को गुल-ए-दाऊदी के रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। आयोजकों को उम्मीद है कि फूलों की यह आकर्षक प्रदर्शनी स्थानीय लोगों के साथ-साथ सैलानियों के लिए भी बड़ा आकर्षण बनेगी।
ड्रीम प्रोजेक्ट है यह गार्डन
मसूम ने बताया कि क्रिसेंथेमम गार्डन विभाग का ड्रीम प्रोजेक्ट है। विभाग की मंशा है कि जिस तरह ट्यूलिप गार्डन वसंत में पर्यटकों को खींचता है, वैसे ही यह गार्डन पतझड़ के मौसम में कश्मीर की खास पहचान बने।
उन्होंने कहा कि कश्मीर का कोई भी मौसम पर्यटकों के लिए फीका नहीं होना चाहिए। वसंत को ट्यूलिप से और शरद ऋतु को क्रिसेंथेमम से जोड़कर साल भर पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है।
सेल्फी प्वाइंट और नई सुविधाएं भी
गार्डन को और ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए फूलों की क्यारियों को बढ़ाया गया है। यहां रंग-बिरंगे फूलों के साथ वाटर फीचर्स, छायादार बैठने के लिए पेर्गोला और सेल्फी प्वाइंट भी बनाए गए हैं।
परिवारों और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर किया गया है, ताकि लोग आराम से घूम सकें, तस्वीरें ले सकें और सुकून के कुछ पल बिता सकें।
इस बगीचे की खूबसूरती सिर्फ क्रिसेंथेमम तक सीमित नहीं है। यहां लगे चिनार, मेपल और जिन्कगो जैसे पेड़ पतझड़ में अपने रंग बदलकर नजारे को और भी दिलकश बना देते हैं। बदलते मौसम में पेड़ों के रंग और फूलों की विविधता मिलकर एक ऐसा मनोरम दृश्य बनाती है जो पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है।
मौसम की चुनौतियों के बावजूद तैयारी पूरी
मसूम ने बताया कि गार्डन को तैयार करने में मौसम की वजह से कई दिक्कतें भी आईं, लेकिन अधिकारियों और मालियों की मेहनत से काम समय पर पूरा कर लिया गया। उनके अनुसार ये फूल करीब डेढ़ महीने तक खिले रहेंगे और मौसम अनुकूल रहा तो 5 या 6 दिसंबर तक इनकी सुंदरता बनी रहेगी।
विभाग को उम्मीद है कि इस शरद ऋतु में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आएंगे। अगर यह पहल कामयाब रही तो कश्मीर में पर्यटन का आकर्षण सिर्फ ट्यूलिप सीजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पतझड़ भी घाटी में घूमने के लिए एक खास सीजन बन जाएगा।