चंडीगढ़, 6 फरवरी 2026(दैनिक खबरनामा)चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या अब शहर की आबादी से भी ज़्यादा हो जाने के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा गंभीर रूप ले चुका है। इसी को देखते हुए यूटी प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक अभियान तेज़ कर दिया है और सभी संबंधित विभागों को इंजीनियरिंग, प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) और आपातकालीन चिकित्सा से जुड़े लंबित कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।जिला सड़क सुरक्षा समिति की 24वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने पुलिस, इंजीनियरिंग विंग और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि चिन्हित खतरनाक स्थानों पर देरी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बैठक में शहर के सबसे व्यस्त और दुर्घटना संभावित जंक्शनों में शामिल एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट के चौड़ीकरण और पुनःडिज़ाइन कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई। इस परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ-साथ इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार टेबल-टॉप्स, कैट-आईज़ और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं। बागवानी विभाग द्वारा 68 पेड़ों को हटाने की अनुमति मिल चुकी है, जिसके बाद चौड़ीकरण का कार्य तुरंत शुरू किया जाएगा।
ट्रैफिक पुलिस ने यूटी सीमा दीवार से लेकर हैलो माजरा लाइट प्वाइंट तक विपरीत कैरिजवे को चौड़ा करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि ट्रैफिक प्रवाह संतुलित रहे। इस पर अंतिम निर्णय के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में अलग बैठक करने का फैसला लिया गया।साइकिल चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हैलो माजरा से मखन माजरा मोड़ और एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट से यूटी सीमा तक साइकिल ट्रैक निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया है, जो मौसम के कारण कुछ समय के लिए रुका हुआ था।इसके अलावा, तेज़ रफ्तार वाहनों और साइकिल चालकों के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए प्रमुख सड़कों पर साइकिल ट्रैकों को भौतिक रूप से अलग करने पर भी ज़ोर दिया गया। पूर्व मार्ग (Purv Marg) पर ट्रिब्यून चौक से ट्रांसपोर्ट चौक तक लगभग 1,050 मीटर साइकिल ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और पूरी परियोजना को 31 मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।बैठक में शहर के 69 घातक सड़क दुर्घटना स्थलों (Fatal Crash Sites) पर किए गए संयुक्त निरीक्षणों की सिफारिशों की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर सुधार कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी पर काम जारी है। शेष सुधार कार्यों को मार्च के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उपायुक्त ने कहा कि हर लंबित सुधार कार्य किसी की जान के लिए खतरा बन सकता है।सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना की स्थिति पर भी चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सितंबर 2025 में योजना बंद होने से पहले 32 मामलों में ₹9 लाख से अधिक के दावे स्वीकृत या लंबित थे। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी पीड़ित को प्रशासनिक कारणों से इलाज से वंचित न किया जाए और बेहतर समन्वय व निगरानी सुनिश्चित की जाए।

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