पंजाब 6 फरवरी 2026 (दैनिक खबरनामा ) मोहाली में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पंजाब पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए डीजीपी से विस्तृत जवाब तलब किया है।
अदालत ने मोहाली के एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक से जुड़े अधिकारी को मोहाली जैसे संवेदनशील जिले में तैनात करने का क्या आधार था।हाईकोर्ट ने एसएसपी कार्यालय के बाहर हुई फायरिंग, चौकीदार की पिटाई और जेलों में अपराधियों के नेटवर्क को गंभीर मुद्दा बताते हुए डीजीपी को हलफनामे सहित रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि पेट्रोलिंग व्यवस्था, चेक पोस्टों पर तैनात पुलिस बल और वीआईपी सुरक्षा में लगाए गए कर्मचारियों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाए।खंडपीठ ने कहा कि हालात चिंताजनक हैं और पुलिस की निष्क्रियता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि मोहाली कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े कर्मचारी की पिटाई कर जबरन घुसपैठ हुई, लेकिन सीजेएम के आदेशों के बावजूद आठ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए डीजीपी गौरव यादव को अदालत ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कदम नहीं उठाए तो कोर्ट को स्वयं आदेश पारित करने पड़ेंगे। डीजीपी ने बताया कि फायरिंग मामले में शूटरों की पहचान कर दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।डीजीपी ने यह भी जानकारी दी कि अब तक 7,000 से अधिक हथियार सील किए गए हैं और 700 से ज्यादा आर्म्स लाइसेंस रद्द किए गए हैं। इसके अलावा 1,100 से अधिक वसूली मामलों में केस दर्ज किए गए हैं।हाईकोर्ट ने फिरौती मामलों में केवल रिकवरी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी से बचने जैसा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध और गैंगवार पर नियंत्रण पाना पुलिस का संवैधानिक दायित्व है।