दैनिक खबरनामा 9 मार्च 2026 Gobind Sagar Lake के कायाकल्प और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित 1500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना चार साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। Bilaspur जिले में स्थित एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में शामिल गोबिंदसागर झील को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की उदासीनता के चलते परियोजना ठप पड़ी है।यह परियोजना वर्ष 2022 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी। योजना के तहत Mandi Bharari क्षेत्र में झील पर बने पुल के नीचे एक चेकडैम बनना था, जिससे झील में सालभर पानी बना रहता और पर्यटक पूरे साल बोटिंग, जैटी, शिकारा और अन्य वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का आनंद ले पाते। वर्तमान में झील में साल में केवल दो से तीन महीने ही पर्याप्त पानी रहता है, जिससे पर्यटन गतिविधियां सीमित हो जाती हैं।परियोजना पर कुल 1500 करोड़ रुपये खर्च होने थे, जिसमें लगभग 1400 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 100 करोड़ रुपये Himachal Pradesh सरकार को खर्च करने थे। इस योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना था। पहले चरण में करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से झील में समाए कहलूर रियासत के ऐतिहासिक मंदिरों—रंगनाथ, खनेश्वर और नारदेश्वर—को लिफ्ट करने की योजना थी, जो छठी से 17वीं सदी की शिखर शैली की स्थापत्य कला को दर्शाते हैं।दूसरे चरण में चार नाव घाट, वॉकवे, संपर्क सड़कें, पार्किंग, पानी-बिजली की व्यवस्था और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। तीसरे चरण में चेकडैम निर्माण का काम होना था, जिससे झील में पूरे साल पानी बना रहता और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां निरंतर चल पातीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलता और रोजगार के अवसर भी बढ़ते। Gobind Sagar Adventure and Water Sports Association की संस्थापक निर्मला राजपूत के अनुसार गर्मियों में झील में पानी नहीं रहने से वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां लगभग बंद हो जाती हैं।स्थानीय संगठनों का कहना है कि यदि परियोजना समय पर पूरी होती तो गोबिंदसागर झील प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकती थी, लेकिन फिलहाल यह योजना सरकारी फाइलों में ही अटकी हुई है।

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