दैनिक खबरनामा 2 अप्रैल 2026 लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने बुधवार को पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार के सेवानिवृत्त होने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वे सेना मुख्यालय में उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) के पद पर कार्यरत थे।
कार्यभार संभालते हुए उन्होंने उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और सभी रैंकों के कल्याण व मनोबल को मजबूत रखने के अपने संकल्प को दोहराया।दिसंबर 1987 में 4वीं बटालियन, पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेस) से अपने सैन्य करियर की शुरुआत करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह के पास लगभग चार दशकों का समृद्ध अनुभव है। उन्होंने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं के संवेदनशील और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई अहम सैन्य फॉर्मेशन्स का नेतृत्व किया है। उनके अनुभव में ऑपरेशन पवन, नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन्स शामिल हैं।वाइस चीफ बनने से पहले उन्होंने सेना मुख्यालय में महानिदेशक परिचालन लॉजिस्टिक्स (DGOL) के रूप में कार्य करते हुए ऑपरेशनल मोबिलिटी, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और स्थायित्व क्षमताओं को मजबूत किया। वीसीओएएस के रूप में उन्होंने सेना की संरचना, क्षमता विकास और ऑपरेशनल तैयारी में अहम योगदान दिया।वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। इसके अलावा उन्होंने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, सिकंदराबाद से डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स और भारतीय लोक प्रशासन संस्थान से एडवांस्ड प्रोफेशनल प्रोग्राम किया है। उनके पास पंजाब विश्वविद्यालय से फिलॉसफी में मास्टर डिग्री भी है।उनकी उत्कृष्ट सेवा और वीरता के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल और सेना मेडल (दो बार) से सम्मानित किया जा चुका है।उन्होंने कहा कि यह नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की निरंतरता, ऑपरेशनल उत्कृष्टता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी कमान भविष्य में मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों, इंटेलिजेंस-ड्रिवन ऑपरेशन्स और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर फोकस बनाए रखेगी, साथ ही नागरिक प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय भी सुनिश्चित किया जाएगा।