दैनिक खबरनामा साहिबजादा अजीत सिंह नगर, 3 अप्रैल 2026
जिला भाषा कार्यालय, साहिबजादा अजीत सिंह नगर के प्रांगण में साहित्यिक संस्था ‘साहित्यक सथ, एस.ए.एस. नगर’ द्वारा डॉ. बलविंदर कौर बराड़ (पूर्व प्रोफेसर, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) के साथ एक विशेष ‘रूबरू’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भाषा विभाग, पंजाब की विभागीय धुन ‘धनु लेखारी नानका’ से की गई।डॉ. दविंदर सिंह बोहा ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए डॉ. बराड़ के पंजाबी भाषा और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. बराड़ निरंतर आगे बढ़ने और कर्मशीलता की मिसाल हैं।मुख्य वक्ता डॉ. बलविंदर कौर बराड़ ने साहित्य, समाज और जीवन दर्शन पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के दौर में लोग एक-दूसरे से प्रश्न-पत्र बनकर मिलते हैं, जबकि जीवन को कविता की तरह जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियों से जूझते हुए कुछ लोग निखर जाते हैं, जबकि कुछ बिखर जाते हैं। हमें दूसरों के दोषों के बजाय उनके गुणों को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।
नारी सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि लड़कियों को दिखावे की दुनिया से दूर रहकर अपनी वास्तविक क्षमताओं को पहचानना चाहिए और आत्मनिर्भर बनना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने भी अपने सवाल रखे, जिनका डॉ. बराड़ ने विस्तारपूर्वक और स्पष्ट रूप से उत्तर दिया। इस अवसर पर एस.के. अग्रवाल, डीएसपी हरसिमरन सिंह बल्ल, डॉ. बलदेव सिंह सप्तरिषी, गुरमीत सिंह जौड़ा, भूपिंदर सिंह, प्रभजोत कौर ढिल्लों, प्यारा सिंह राही, भूपिंदर मलिक, सुरिंदर अते सिंह, डॉ. गुरमिंदर कौर सिद्धू और सुरिंदर कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम के अंत में डॉ. बलविंदर कौर बराड़ को सम्मान चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. दर्शन कौर (खोज अधिकारी) ने सभी अतिथियों और श्रोताओं का धन्यवाद किया। मंच संचालन दिलप्रीत द्वारा किया गया।इस अवसर पर जिला भाषा कार्यालय द्वारा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में प्रो. लाभ सिंह खीवा, वरिंदर चठा, हरमीत सिंह, परमजीत मान, भूपिंदर कौर, मनजीत पाल सिंह, अमर गीत, मोहिनी तूर, जतिंदरपाल सिंह, गुरदर्शन बैंस, डॉ. सुरिंदर कुमार, जपनीत कौर, सुरजीत सुमन, इंदरजीत परेमी, जसविंदर काइनौर, अमरजीत कौर, मोहिंदर सिंह, कुलदीप सिंह, मनजीत सिंह सहित अन्य लोग और स्टेनोग्राफी के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।