दैनिक खबरनामा 7 मार्च 2026 चंडीगढ़ के सेक्टर-9 में प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत सिंह उर्फ चिन्नी हत्याकांड में क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि हत्या की साजिश जनवरी महीने में ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन उस समय शूटरों को दिया गया हथियार तकनीकी खामी के कारण फेल हो गया, जिससे वारदात टल गई।पुलिस के मुताबिक जनवरी में राहुल शर्मा कजहेड़ी में पीयूष पहलवान को पिस्टल देने पहुंचा था। उसके साथ एक अन्य सहयोगी भी मौजूद था, लेकिन परीक्षण के दौरान पिस्टल से गोली नहीं चली। इसके बावजूद आरोपियों ने रेकी पूरी कर ली और योजना को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया।
करीब दो महीने बाद 18 मार्च को उसी साजिश को अंजाम देते हुए चिन्नी की हत्या कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे गैंगस्टर लक्की पटियाल और मुकुल राणा की मुख्य भूमिका थी। मुकुल राणा ने राहुल शर्मा के जरिए शूटरों तक हथियार, बाइक और अन्य संसाधन पहुंचाए।पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि हत्या के लिए फंडिंग का इंतजाम राहुल शर्मा ने किया था। उसने दो चरणों में कुल ढाई लाख रुपये जुटाए, जिन्हें मनी एक्सचेंज के जरिए विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया। प्रारंभिक जांच में इस रकम के हत्याकांड में इस्तेमाल होने की पुष्टि हुई है।वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक भी चोरी की थी, जिसे पहले डड्डूमाजरा इलाके में छिपाया गया और बाद में कजहेड़ी लाकर शूटरों को सौंपा गया। सेक्टर-38 के पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाने के बाद हथियार, बाइक और 20 हजार रुपये शूटरों को दिए गए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बीच बातचीत के लिए जंगी मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्धों की पहचान कर ली है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।चिन्नी हत्याकांड के बाद पंजाब एजीटीएफ ने पीयूष और प्रीतम को कैथल से गिरफ्तार किया था, जहां मुठभेड़ में दोनों घायल हो गए थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।