दैनिक खबरनामा | 23 अक्टूबर | नई दिल्ली।
अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारतीय सुरक्षा बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के बीच आमना-सामना हुआ है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में ऐसी स्थितियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने ‘शौर्य कमांडो’ के प्रदर्शन की सराहना की।
ITBP के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित समारोह में कपूर ने बताया कि बल की हर बटालियन में एक कमांडो टीम तैयार है, जबकि दो और टीमों के गठन की प्रक्रिया जारी है। लक्ष्य प्रत्येक बटालियन में पूर्ण कमांडो कंपनी बनाना और विशेष अभियानों के लिए अलग बटालियन गठित करना है।
ड्रोन और आधुनिक उपकरणों पर जोर
ITBP प्रत्येक प्लाटून में ड्रोन यूनिट स्थापित करने, ड्रोन निर्माण बढ़ाने और पायलटों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम कर रही है। वर्ष 2030 तक आधुनिकीकरण के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलने की उम्मीद है। ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
बल आधुनिक हथियारों, गोला-बारूद, स्वचालित जमीनी वाहनों और त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों को भी शामिल करने पर विचार कर रहा है। कपूर ने विशेष आक्रामक क्षमता वाली ‘स्ट्राइक कॉर्प्स’ विकसित करने की संभावना का भी संकेत दिया, हालांकि इसकी संरचना पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
LAC पर तनाव कम करने की कोशिश
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण गश्त के दौरान तनाव की स्थितियां पैदा होती रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, नए विवादित क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के व्यवहार को लेकर भारतीय सेना ने सख्त रुख अपनाया है।
लद्दाख के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर होने वाली वार्ताओं का उद्देश्य तनाव कम करना और लंबित मुद्दों का समाधान खोजना है। ITBP का आधुनिकीकरण और कमांडो इकाइयों का विस्तार कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में निगरानी तथा त्वरित कार्रवाई की क्षमता मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, प्रस्तावित योजनाओं के अंतिम स्वरूप और समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।