दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 3 जुलाई: भारत और जापान ने गुरुवार को पाकिस्तान की जमीन से संचालित सीमा पार आतंकवाद पर बेहद सख्त रुख दिखाते हुए इसकी खुलकर भर्त्सना की। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि आतंक को मिलने वाली सरकारी मदद, सुरक्षित पनाहगाहों और आर्थिक मदद के सभी स्रोतों को तुरंत बंद करने के लिए निर्णायक कदम उठाए जाएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाईची के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी साझा वक्तव्य में दक्षिण एशिया में आतंक के बढ़ते खतरे को लेकर साझा चिंता और एकजुट रणनीति जाहिर की गई।
पहलगाम हमले पर सख्त रुख
दोनों नेताओं ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए बर्बर आतंकी हमले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी टीम की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें इस हमले के पीछे ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की भूमिका बताई गई है।
इसके साथ ही 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के समीप हुए घातक कार बम विस्फोट की भी निंदा की गई। दोनों देशों ने जोर देकर कहा कि इन हमलों को अंजाम देने वाले, साजिश रचने वाले और वित्तीय मदद पहुंचाने वाले हर व्यक्ति को बिना विलंब दंडित किया जाना चाहिए।
आतंकी संगठनों पर सीधा निशाना
मोदी और ताकाईची ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित सभी आतंकी संगठनों और उनसे जुड़े समूहों के खिलाफ तत्काल, समन्वित वैश्विक कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल-कायदा और आईएसआईएस का उल्लेख किया।
बयान में कहा गया कि विश्व समुदाय को आतंकियों के ठिकाने पूरी तरह खत्म करने, आतंकी फंडिंग और संगठित अपराध के बीच के गठजोड़ को तोड़ने तथा आतंकियों की सीमा पार आवाजाही रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करनी होगी।
समुद्री सुरक्षा पर भी चिंता
दोनों नेताओं ने ईस्ट चाइना सी और साउथ चाइना सी की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने ऐसे किसी भी एकपक्षीय कदम का साफ विरोध किया जो नौवहन और उड़ान की स्वतंत्रता के लिए खतरा बने, बलपूर्वक यथास्थिति बदलने का प्रयास करे या विवादित क्षेत्रों का सैन्यीकरण बढ़ाए।