दैनिक खबरनामा
लंदन, 4 जुलाई: ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण की उम्मीदों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने प्रस्तावित भूखंड हिंदू संगठन के बजाय चर्च के नेतृत्व वाली संयुक्त परियोजना को आवंटित करने का निर्णय लिया। काउंसिल यह जमीन 999 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराएगी।
इस परियोजना का नेतृत्व नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क (NCN) करेगा। योजना के तहत चर्च के साथ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए स्थायी नमाज स्थल और एक शिक्षा केंद्र भी विकसित किया जाएगा।
दूसरी ओर, स्थानीय हिंदू समुदाय की ओर से हिंदू समाज नॉर्थस्टो (HSN) चैरिटी ने इसी भूमि पर एक हिंदू मंदिर के साथ इंटरफेथ एवं वेलनेस सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। हालांकि, काउंसिल की मूल्यांकन प्रक्रिया में HSN को 65 प्रतिशत अंक मिले, जबकि NCN ने 81 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसी आधार पर जमीन NCN को आवंटित कर दी गई।
NCN की योजना में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए इस्लामिक प्रार्थना कक्ष भी शामिल है। नॉर्थस्टो मुस्लिम समुदाय का कहना है कि शहर में 200 से अधिक मुस्लिम रहते हैं और उन्हें पांचों वक्त की नमाज के लिए एक स्थायी स्थान की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
काउंसिल के फैसले के बाद हिंदू समुदाय में निराशा का माहौल है। HSN की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन को सीमित वित्तीय रिकॉर्ड के कारण कम अंक दिए गए, जबकि पहले यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि मूल्यांकन में इस पहलू को इतना महत्व दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि दिशा-निर्देश पहले से स्पष्ट होते, तो संगठन आवश्यक वित्तीय दस्तावेजों के साथ आर्किटेक्ट की रिपोर्ट भी समय रहते प्रस्तुत कर सकता था। HSN अब इस निर्णय के खिलाफ अपील करने की संभावना पर विचार कर रहा है।
कैम्ब्रिजशायर में चर्च और मस्जिदें तो मौजूद हैं, लेकिन अब तक कोई हिंदू मंदिर स्थापित नहीं हो पाया है। इसके कारण स्थानीय हिंदू परिवारों को पूजा-अर्चना के लिए बर्मिंघम या लंदन के वेम्बली तक लगभग दो घंटे की यात्रा करनी पड़ती है।
स्थायी मंदिर के अभाव में गणेश उत्सव, महाशिवरात्रि और हवन जैसे धार्मिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित नहीं हो पाते। कई अवसरों पर पूजा की मूर्तियों को बैग या गैराज में सुरक्षित रखना पड़ता है, जिससे उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है।
नॉर्थस्टो की 16 वर्षीय एयवा ने कहा कि उन्हें कभी पूरी रात चलने वाली महाशिवरात्रि या हवन जैसे धार्मिक आयोजनों में शामिल होने का अवसर नहीं मिला। उनके अनुसार, भारत में रहने वाले उनके रिश्तेदार अपने त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं, जबकि ब्रिटेन में पली-बढ़ी नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से दूर होती जा रही है।
वहीं, काउंसिल की सदस्य डॉ. लिसा रेडरप ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सभी आवेदनों का मूल्यांकन पहले से निर्धारित नियमों और समान मानदंडों के आधार पर किया गया। उनके मुताबिक, प्रत्येक प्रस्ताव की आवश्यकता, वित्तीय तैयारी और व्यवहारिकता का निष्पक्ष आकलन करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया गया।