दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 7 जुलाई 2026. कान, नाक और गले (ईएनटी) से जुड़ी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर यही बीमारियां गंभीर रूप धारण कर सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कान का लगातार संक्रमण, लंबे समय तक नाक बंद रहना, सुनने की क्षमता में कमी या मुँह के छाले जैसी समस्याओं को हल्के में लेना भविष्य में जटिल सर्जरी और जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य के पात्र मरीजों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में आधुनिक ईएनटी सर्जरी निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 2,030 मरीजों की ईएनटी सर्जरी की जा चुकी है, जिन पर लगभग 5.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

रूपनगर स्थित सिविल अस्पताल की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. निधि गुप्ता ने बताया कि अधिकांश मरीज शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। कान से लगातार पानी बहना, कम सुनाई देना, नाक का लंबे समय तक बंद रहना या मुँह के छाले जैसे संकेत कई बार गंभीर बीमारियों की शुरुआत हो सकते हैं। समय पर उपचार न मिलने से स्थायी बहरापन, क्रोनिक साइनस संक्रमण और मुँह के कैंसर जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साढ़े पांच महीनों में राज्य में लगभग 1,050 कानों की सर्जरी की गईं, जिन पर करीब 2.9 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें कान के पर्दे की मरम्मत और पुराने संक्रमण को दूर करने वाली सर्जरियां प्रमुख रहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर ऑपरेशन करवाने से सुनने की क्षमता बहाल होने के साथ संक्रमण को अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक फैलने से भी रोका जा सकता है।

नाक और साइनस से जुड़ी बीमारियां भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। राज्य में लगभग 900 नाक और साइनस सर्जरियां की गईं, जिन पर 2.1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आया। डॉक्टरों के अनुसार कई लोग वर्षों तक केवल नाक के स्प्रे पर निर्भर रहते हैं, जबकि समस्या की जड़ का उपचार नहीं कराते। आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी से लंबे समय तक राहत मिलती है और सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है।

विशेषज्ञों ने मुँह और जीभ के कैंसर को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन देर से पहचान होने के कारण ये सबसे जटिल ईएनटी सर्जरियों में शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दो सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाला मुँह का छाला, सफेद या लाल धब्बे, निगलने में कठिनाई अथवा जीभ में लगातार दर्द कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। तंबाकू, गुटखा, सुपारी और शराब इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि कान, नाक या गले से जुड़ी कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। उनका कहना है कि समय पर जांच और उपचार न केवल गंभीर बीमारियों से बचाव करता है, बल्कि मरीज के स्वस्थ होने की संभावना को भी कई गुना बढ़ा देता है।

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