दैनिक खबरनामा शिमला, 30 मई : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सचिवालय में अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों से आए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई और शैक्षणिक अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को 20 लाख रुपये तक का ऋण मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने और अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश के 156 से अधिक विद्यालयों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा पद्धति लागू की गई है, ताकि विद्यार्थियों को अपने घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इन विद्यालयों में कला, विज्ञान और वाणिज्य विषयों की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाते हुए देश में छठा स्थान हासिल किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने बेटियों के विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाकर 21 वर्ष कर दी है, जिससे उन्हें शिक्षा और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें। साथ ही, अनुसूचित जनजाति समुदाय में शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 मई से 9 जून 2026 तक अनुसूचित जनजाति गरिमा उत्सव मनाया जा रहा है।
बैठक में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।