दैनिक खबरनामा। धर्मशाला, 26 अक्टूबर : कांगड़ा जिले में पैराग्लाइडिंग के दौरान हुए हादसों ने पायलटों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खनियारा के राइजिंग स्टार पीक के पास तेज हवा के कारण हुए हादसे में बुल्गारिया के 47 साल के पैराग्लाइडिंग पायलट की मौत हो गई, जबकि उसके साथ उड़ान भर रहा ब्रिटेन का नागरिक सुरक्षित बचा लिया गया।
वहीं धौलाधार की बर्फ से ढकी पहाड़ियों में फंसे ऑस्ट्रिया और पोलैंड के दो विदेशी पैराग्लाइडर पायलटों को भी बीते दिन चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया।
पुलिस के मुताबिक 25 अक्टूबर को बुल्गारिया निवासी मक्सिम वेलेंटाइनोविच गवरीलिचेंको (47) अपने ब्रिटिश मित्र स्टीफेन एंटोनी पर्दे के साथ बीड़-बिलिंग से सोलो पैराग्लाइडिंग उड़ान पर निकला था। दोपहर करीब 3 से साढ़े 3 बजे के बीच खनियारा स्थित राइजिंग स्टार पीक के पास तेज हवा के चलते हादसा हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय हिम संसार रेस्क्यू टीम ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया
रात करीब 9 बजे टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हुईं। दुर्गम पहाड़ी इलाके में रातभर तलाशी अभियान चलाया गया। सोमवार सुबह करीब 10 बजे ऑपरेशन पूरा हुआ। इस दौरान मक्सिम मृत मिला, जबकि ब्रिटेन निवासी स्टीफेन को सुरक्षित निकाल लिया गया।
मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए जोनल अस्पताल धर्मशाला के शवगृह में रखा गया है। पुलिस मामले में जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रही है। पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा ने घटना की पुष्टि की है।
बर्फीली चोटियों में चार रात तक फंसा रहा पायलट
दूसरे रेस्क्यू ऑपरेशन में ऑस्ट्रिया के सेबेस्टियन और पोलैंड के एडम विस्ज़्प्यागा को धौलाधार की ऊंची पहाड़ियों से सुरक्षित निकाला गया। इन्होंने बीते बुधवार को बीड़-बिलिंग से उड़ान भरी थी, लेकिन तय लैंडिंग स्थल तक नहीं पहुंच पाए।
जानकारी के मुताबिक सेबेस्टियन चार रात तक मैक्लोडगंज के उत्तर में बर्फ से ढकी दुर्गम खाई में फंसा रहा, जबकि एडम ने पालमपुर के उत्तर में करीब 3,800 मीटर की ऊंचाई पर दो रातें बिताईं।
दोनों पायलटों को निकालने के लिए पर्वतारोहण विशेषज्ञों, सुरक्षा टीमों और सेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई। सेबेस्टियन को निकालने के लिए 24 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने चुनौतीपूर्ण अभियान चलाया। दोनों पायलट सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्हें मेडिकल जांच के लिए विवेकानंद मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने बीड़-बिलिंग से उड़ान भरने वाले पैराग्लाइडरों के लिए मौसम और हवा की स्थिति पर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत को फिर से रेखांकित किया है।
पैराग्लाइडिंग के दौरान बरतें ये सावधानियां
अनुभवी पायलट के साथ ही उड़ान भरें, उसके लाइसेंस, प्रशिक्षण और संबंधित अनुमति की जरूर जांच करें।
– हेलमेट सही तरीके से पहनें। हार्नेस, बकल और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच कर लें।
– तेज हवा, तूफान, बारिश, कम दृश्यता या अस्थिर मौसम में उड़ान न भरें। मौसम खराब होने पर उड़ान रद्द करना ही सुरक्षित है।
– टेकऑफ, उड़ान और लैंडिंग के दौरान पायलट के निर्देशों को ध्यान से सुनें। अपनी मर्जी से कोई हरकत न करें।
– टेकऑफ के समय पायलट के संकेत पर ही आगे बढ़ें। बिना निर्देश के रुकने, बैठने या पीछे मुड़ने की कोशिश न करें।
– ढीले कपड़ों और सामान से बचें। मजबूत जूते पहनें, मोबाइल, कैमरा और अन्य सामान सुरक्षित रखें ताकि वे उड़ान के दौरान गिरें नहीं या किसी उपकरण में न फंसें।
– लैंडिंग के समय सतर्क रहें। पायलट के निर्देश के अनुसार पैरों की स्थिति रखें और उतरते समय संतुलन बनाए रखें। समय से पहले हार्नेस से बाहर निकलने की कोशिश न करें।
– चक्कर, बेहोशी, गंभीर हृदय रोग या ऐसी कोई स्थिति जो उड़ान को जोखिम भरा बना सकती है तो पहले डॉक्टर से सलाह लें। गर्भावस्था में पैराग्लाइडिंग से बचें।
– उपकरणों की जांच में पैराग्लाइडिंग की कैनोपी, रस्सियों, हार्नेस और अन्य सुरक्षा उपकरणों की उड़ान से पहले जांच होनी चाहिए।
– जल्दबाजी में उड़ान न भरें, भीड़, दबाव या सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए जोखिम न लें। पायलट या मौसम को लेकर संदेह हो तो उड़ान से इनकार कर दें।