हिमाचल में तीन साल में 972 करोड़ का मछली उत्पादन, 1,553 युवाओं को मिला रोजगार; 42 हजार मत्स्य पालकों को बीमा सुरक्षा

दैनिक खबरनामा। शिमला, 8 जून 2026:  हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र विकास, स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का नया आधार बनकर उभरा है। बीते तीन वर्षों में राज्य सरकार की विभिन्न मत्स्य विकास योजनाओं के माध्यम से 1,553 युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। बायोफ्लाक तकनीक, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), ट्राउट फार्मिंग और तालाब आधारित मत्स्य पालन जैसी आधुनिक तकनीकों ने युवाओं के लिए नए उद्यमों के द्वार खोले हैं।

जनवरी 2023 से मार्च 2026 के दौरान प्रदेश में 60,799.66 टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 972.46 करोड़ रुपये रही। वर्ष 2023-24 में 17,721.64 टन, 2024-25 में 19,019.83 टन और 2025-26 में रिकॉर्ड 20,005.97 टन मछली उत्पादन हुआ। इस वृद्धि ने हजारों परिवारों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान की है।

मछुआरों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर लगने वाली रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर पहले 7.5 प्रतिशत और अब वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मात्र एक प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के छह हजार से अधिक मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा।

सरकार ने 42 हजार से अधिक मछुआरों और मत्स्य पालकों को दुर्घटना बीमा सुरक्षा प्रदान की है, जबकि 1,786 लाभार्थियों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सुविधा से जोड़ा गया है। इसके अलावा 13,767 मछुआरों को विभिन्न योजनाओं के तहत 6.19 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।

प्रदेश के निजी ट्राउट किसानों ने पिछले वर्षों में 5,000.87 टन ट्राउट मछली का उत्पादन कर लगभग 333.40 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वहीं विभागीय ट्राउट फार्मों ने 42.29 टन उत्पादन के माध्यम से 2.35 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की। कुल्लू के पतलीकूहल में स्थापित कोल्ड वाटर आरएएस प्रणाली से ट्राउट उत्पादन का चक्र 14 माह से घटकर 10 माह रह गया है, जिससे उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना शुरू की है, जिसके तहत लाभार्थियों को 80 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है। साथ ही प्रदेश का पहला महाशीर संरक्षण कार्यक्रम भी आरंभ किया गया है, जिसके तहत 40 हजार से अधिक गोल्डन महाशीर फिंगरलिंग विभिन्न नदियों और जलाशयों में छोड़े गए हैं।

मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए विभाग को स्काच गोल्ड अवॉर्ड-2025 से सम्मानित किया गया है। सरकार का मानना है कि नीली क्रांति न केवल युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ बना रही है। वर्तमान में 18,649 मछुआरों को पूर्णकालिक स्वरोजगार प्राप्त है, जिससे यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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