दैनिक खबरनामा । शिमला, 18 जून : राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। राज्य सरकार को अपनी प्रतिबद्ध वित्तीय देनदारियों—वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज के भुगतान—को पूरा करने के लिए एक बार फिर बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी करनी पड़ रही है।
इससे पहले मई 2026 में भी सरकार ने 500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। वित्त विभाग ने नई उधारी से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। राज्य सरकार को हर महीने वेतन, पेंशन, ब्याज और ऋण की किस्तों के भुगतान के लिए लगभग 2,800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है।
जानकारी के अनुसार, हर माह कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि पुराने कर्ज के ब्याज भुगतान के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये और मूलधन चुकाने के लिए 300 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ती है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार पहले ही 900 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण के लिए आवेदन कर चुकी है। नई उधारी के बाद राज्य पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।
वित्तीय तंगी के बीच जून माह में सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ने वाला है। दरअसल, 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों का वेतन स्थगित (डेफर) कर दिया था। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह रोका गया वेतन जून माह के नियमित वेतन के साथ जारी किया जाएगा।
वित्त विभाग ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में जून के दौरान राज्य के खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है, जिससे सरकार की वित्तीय चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।